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Bahraich News: प्यास बुझाने को जंगल से बाहर का रुख कर रहे वनराज

Mon, 12 Jun 2023 11:22 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
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मिहींपुरवा(बहराइच)। जंगल में बढ़ते इंसानी दखल व गर्मी से पानी का संकट होने पर हिंसक जानवर आबादी के तरफ रुख करने लगे हैं। यही नतीजा है कि जानवरों के हमलों में भी तेजी आई है। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग वैसे तो जानवरों के लिए काफी मुफीद माना जाता है लेकिन इस समय वहां भी जानवरों को खाना व पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
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कतर्नियाघाट से ही सटे दुधवा नेशनल पार्क में तीन बाघ की मौत के बाद अब यहां पर भी वन विभाग ने पहले से और सक्रियता दिखाना शुरू कर दियाा है। 551 वर्ग किलोमीटर में कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग का फैला भूभाग व बीच से गुजरने वाली गेरूहा, कौडियाला नदी के साथ नेपाल से बहकर निकलने वाले नाले गर्मियों में जंगली जानवरों के लिए अनुकूल है। कतर्नियाघाट के जंगल में पाये जाने वाले जंगली जानवर इन्ही से अपनी प्यास बुझाते हैं। लेकिन इस समय जंगल टाइगर और तेंदुओं के आये दिन आबादी क्षेत्र में निरंतर जाने से यह साबित हो रहा है कि कहीं जंगल में उनके भोजन की कमी तो नहीं है।
वन विभाग के एक सर्वे के मुताबिक कतर्निया के जंगल में प्रवास करने वाले वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि हुई है। वर्ष 2023 में डब्लूटीआई द्वारा सर्वे कर जंगली जानवरों की गणना का कार्य किया गया है। इसकी रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गयी है। एक अनुमान के मुताबिक इस समय कतर्निया के जंगल में टाइगर 40 से 45, तेंदुआ 120 से 140, हिरन 7000 से 7200, गैंडा 3 से 4 मौजूद हैं। कतर्निया में दो पालतू हाथियों के साथ जंगली हाथियों की 20 से 25 की संख्या है। वहीं यहां चीतल, बंदर व घड़ियाल और मगरमच्छ की भी संख्या काफी है।
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बाघ व तेंदुए क हमले में हुई मौतबीते 13 मार्च को निशानगाड़ा रेंज के फकीरपुरी की महिला लल्लू बाघ के हमले में घायल हो गई। 31 मार्च को खेत की रखवाली कर रहे प्रीतम सिंह को वनराज ने मौत के घाट उतार दिया। इसी दिन मुर्तिहा रेंज के सेमरी घटही गांव में तेंदुए के हमले में संतोष घायल हो गया। 11 अप्रैल को मोतीपुर रेंज के हंसुलिया गांव में तेंदुए के हमले में रत्तीदेवी की मौत हो गई। 18 अप्रैल को मवेशी चरा रहे हरमेश भी वनराज का शिकार बन गए। 23 अप्रैल को अमीरखांपुरवा के आकाश को हिंसक वन्यजीव ने हमला कर मार डाला।
जंगल में नहीं मिल रहा शिकार
हिंसक जानवरों के शिकार बनने वाले मवेशियों की तादाद में भी इजाफा हुआ है। इससे साफ जाहिर है कि गर्मी के दौरान जंगल में पर्याप्त शिकार न मिलने के कारण दुधारू मवेशी गाय, भैंस एवं बकरी एवं उनकी संतति की तलाश में वनराज आबादी की ओर रुख कर रहे हैं। गन्ने के खेतों में यह अपना ठिकाना बनाते है।
बाघों के ज्यादातर हमले जंगल के भीतर हैं। लकड़ी की तलाश में लोग जंगल में प्रवेश करते हैं, ऐसे में बाघ के हमले का शिकार बनते हैं। तेंदुआ जरूर आसान शिकार की तलाश और बाघ से बचने के लिए गन्ने के खेत में ठिकाना बना रहे हैं। वन विभाग की टीम लगातार सक्रिय रहती है। जंगल में पानी का पर्याप्त इंतजाम है।
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-आकाशदीप बधावन, डीएफओ कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार
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