तराई में दिमागी बुखार ने कहर मचाना शुरू कर दिया है। मंगलवार को दिमागी बुखार से पीड़ित दो बच्चों की जिला अस्पताल में मौत हो गई। अचानक बढ़े प्रकोप से पीडियाट्रिक आईसीयू मरीजों से भर गया है। अस्पताल में संसाधन कम पड़ गए हैं।
मरीजों को परेशानी हो रही है। अस्पताल प्रशासन ने भर्ती बच्चों में रोग की पुष्टि के लिए मंगलवार को 10 सैंपल लैब पीजीआई, लखनऊ भेजे हैं। तराई में प्रतिवर्ष दिमागी बुखार (जेई, एईएस) से मासूमों की जान जाती है। पिछले वर्ष करीब 250 बच्चे इस रोग से असमय मौत का शिकार हुए थे। इस वर्ष स्वास्थ्य विभाग ने जापानी इंसेफेलाइटिस टीकाकरण अभियान चलाया।
इसके बावजूद तराई में मासूम दिमागी बुुखार की चपेट में आने लगे हैं। जिला अस्पताल के आईसीयू वार्ड में हुजूरपुर के बेहिलिया गांव निवासी मैसरुन (10), महिमा (3) निवासी हुजूरपुर, विवेक कुमार (11) निवासी रामप्रसाद पुरवा, शिखा (12) निवासी गोकुलपुर, गुंजना (8) निवासी कमलाजोत, चांदनी (6) निवासी भिखारीपुर, शांति देवी (7) निवासी नानपारा, सूरज पांडेय (5) निवासी भिनगा समेत 10 बच्चों को भर्ती कराया गया है।
ऐसे मरीजों से वार्ड फुल हो गया है। वहीं रामगांव निवासी संध्या (8) पुत्री दीनानाथ और रुपईडीहा क्षेत्र में ससौना गांव निवासी दिलीप (15) पुत्र सोमई की दिमागी बुखार मौत हो गई। ये बच्चे बुखार के साथ झटके आने की शिकायत से पीड़ित थे।