तराई में दिमागी बुखार लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। बुखार से दो मासूमों की रविवार को मौत हो गई। आठ और रोगी भर्ती हुए हैं। उनका रक्त परीक्षण के लिए भेजा गया है। इनमें तीन रोगियों की हालत नाजुक है। बुखार के कारण उन्हें तेज झटके भी आ रहे हैं।
जिसके कारण डॉक्टरों ने दिमागी बुखार होने की आशंका जतायी है। दिमागी बुखार से तराई में मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। जिला अस्पताल में दो दिन पूर्व दिमागी बुखार से पीड़ित हालत में भर्ती मल्हीपुर नसरुलपुर निवासी संदीप (3) पुत्र कैलाश को भर्ती कराया गया था।
रविवार सुबह उसकी तबियत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने काफी कोशिश की, लेकिन संदीप ने दम तोड़ दिया। उधर, दिमागी बुखार से पीड़ित बलरामपुर के तुलसीपुर निवासी बाबू (2) पुत्र जगदीश को लेकर परिवारीजन दोपहर में अस्पताल पहुंचे। इलाज शुरू होने के पहले ही उसकी भी मौत हो गई।
परिवारीजन रोते-बिलखते शव लेकर घर लौट गए। डॉक्टरों के मुताबिक तेज बुखार के साथ झटके आ रहे थे। मरीज अचेतावस्था में था। परिवारीजनों ने उन्हें लाने में देरी की। बुखार से पीड़ित हालत में आठ और रोगी भर्ती हुए हैं।
इनमें जरवल निवासी सुखनंदन (2), माधवपुर निवासी बबलू (डेढ़) और दरगाह निवासी अशफाक (3) की हालत नाजुक है। तेज बुखार के साथ झटके आने के चलते डॉक्टरों ने दिमागी बुखार की आशंका जतायी है।
जिला चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा ने बताया कि बीते दो दिनों में रोगियों की संख्या में अचानक इजाफा हुआ है। लेकिन घरेलू इलाज के चक्कर में परिवारीजन रोगियों को समय पर इलाज नहीं दे पा रहे, जिससे उनकी मौत हो रही है।