जुमेरपुर गांव के पास स्पर की मरम्मत का कार्य कर रहे पिता को सगे भाई सुबह खाना देने गए थे। पिता खाना खाकर पानी पीने चला गया तो दोनों नदी में नहाने लगे। तभी पैर फिसलने से छोटा भाई डूबने लगा। उसे बचाने में बड़ा भाई भी गहरे पानी में चला गया।
दोनों की चीख सुनकर तटबंध पर काम कर रहे मजदूर दौड़े लेकिन तब तक दोनों भाई डूब गए। मजदूरों ने कड़ी मशक्कत कर दोनों के शव को नदी से निकाला। सगे भाइयों के डूबने से तट पर कोहराम मच गया। सूचना पर तहसीलदार और एसओ मौके पर पहुंच गए।
जरवलरोड थाना के बहरामपुर गांव निवासी रामकुमार का परिवार कटान से पीड़ित है। मकान और खेत घाघरा नदी में कटने के बाद पूरा परिवार घाघरा घाट फसल अनुसंधान केंद्र के निकट झोपड़ी बनाकर रह रहा है। रामकुमार परिवार के भरण पोषण के लिए बेलहा बेहरौली तटबंध पर स्पर के मरम्मत कार्य में मजदूरी करता है।
प्रतिदिन की तरह रामकुमार बुधवार भोर में ही जुमेरपुर स्थित कार्य स्थल पर पहुंच गया। सुबह 11 बजे के आसपास रामकुमार का बड़ा बेटा दीपक (13) छोटे भाई कुलदीप (9) के साथ पिता के लिए खाना लेकर स्पर पर पहुंचा। पिता ने खाना खाकर दोनों बेटों को घर जाने को कहा और खुद कुछ दूरी पर स्थित हैंडपंप पर पानी पीने चला गया।
इसी दौरान घर न जाकर दोनों भाई घाघरा नदी में नहाने उतर गए। नहाते समय पैर फिसलने से कुलदीप डूबने लगा। उसे बचाने में दीपक ने हाथ बढ़ाया लेकिन वह भी नदी के गहरे पानी में पहुंच गया। दोनों भाइयों की चीख सुनकर स्पर पर काम कर रहे मजदूर दौड़े लेकिन तब तक दोनों डूब चुके थे।
आननफानन में तैराक मजदूरों ने नदी में कूदकर भाइयों की खोज शुरू की। 25 मिनट के बाद दोनों को बाहर निकाला जा सका। तत्काल दोनों को सीएचसी मुस्तफाबाद पहुंचाया गया लेकिन वहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। दोनों भाइयों के शव घर पहुंचे तो कोहराम मच गया।
सूचना पाकर तहसीलदार डॉ. उमाशंकर त्रिपाठी, राजस्व निरीक्षक गिरधारी लाल और थाने की पुलिस पहुंच गई। परिवारीजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर दिया। इसके कारण पंचनामा कर दोनों के शव को दफना दिया गया है।