बहराइच। कतर्निया की आबो हवा बाघों को भाने लगी है। दुधवा नेशनल पार्क से भी ज्यादा बाघों की संख्या कतर्नियाट में निकली है। मंगलवार को इस बारे में वन विभाग ने अधिकारिक आंकड़े बताए, जिसके बाद यह बात सामने आई है। दुधवा में 35 बाघ हैं। दुधवा का ही हिस्सा किशनपुर सेंचुरी में 41 तो कतर्नियाघाट में 59 बाघ निकले हैं।
इनमें नर व मादा बाघ शामिल है। करीब 15 से ज्यादा बाघों के शावक भी इनके साथ मौजूद है। शावकों की संख्या विभाग द्वारा जारी नहीं की जाती है। वर्ष 2018 में हुई बाघों की गणना जारी की गई थी तो 29 बाघ कतर्नियाघाट में थे। लेकिन वर्ष 2023 की गणना में यहां करीब दोगुना 59 बाघ हो गए है। कतर्नियाघाट को लखीमपुर खीरी जिले में स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व का हिस्सा माना जाता है। इसके साथ ही किशनपुर सेंचुरी भी इसी का हिस्सा है।
कतर्निया में 251 कैमरों से हुई निगरानी
कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार में बाघों की गणना के लिए वन विभाग ने 251 जगहों पर नाइट विजन कैमरे लगाए थे। इन कैमरों की फुटेज में 10752 जगहों पर ट्रैक किए गए। इनमें नर व मादा बाघ शामिल है। इसी तरह दुधवा नेशनल पार्क में 296 जगहों पर कैमरे लगे। यहां पर 12907 जगहों पर बाघ कैद हुए इनमें 35 बाघ निकले। इसी तरह किशुनपुर सेंचरी में 98 जगहों पर कैमरे लगे। इनमें 8722 जगहों पर बाघ ट्रैक हुए। यहां 41 बाघ मिले है।
बाघों की पंसदीदा जगह
कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग को 1975 में अभ्यारण का दर्जा दिया गया। तब से यहां बाघों के संरक्षण को लेकर निरंतर प्रयास किए गए। इसका नतीजा रहा कि वर्ष 2018 की गणना के मुताबिक यहां 29 बाघों की संख्या बढ़कर 59 तक पहुंच गई। यहां पर गेरुआ एवं कौड़ियाला नदी के साथ दो दर्जन तालाबों में पर्याप्त जल है। शिकार के लिए हिरन, नीलगाय, जंगली सुअर की अच्छी तादाद है। दुधवा से संबद्ध कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार बाघों के प्राकृतिक वास के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है। यही कारण है कि यहां निरंतर बाघों की संख्या बढ़ती जा रही है।
क्लब की टीम कर रही जागरूक
2005 में गठित हुए कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब के माध्यम से क्लब के अध्यक्ष भगवान दास लखमानी आज तक वन्य जीव संरक्षण में विभाग का सहयोग कर रहे हैं। क्लब के माध्यम से जंगल के आसपास रहने वाले ग्रामीणों को जागरूक कर रहे हैं, जिसका सबसे बड़ा सुखद परिणाम आज आया है। कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग में बाघों की शानदार वृद्धि पर क्लब के सभी सदस्यों ने प्रसन्नता व्यक्त की है और डीएफओ आकाशदीप बधावन को बधाई दी है।
कतर्नियाघाट में वर्ष 2018 की गणना के मुताबिक करीब 29 बाघ थे। वर्ष 2023 की गणना के अनुसार यहां पर 59 बाघ निकले है। बाघों की संख्या बढ़ना एक अच्छा संदेश है।
-आकाशदीप बधावन,डीएफओ, कतर्नियाघाट