- कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार में 59 बाघ तो 20 से अधिक शावक मौजूद
- नदियों का जलस्तर घटने से जंगल से बाहर निकलने लगे बाघ
- दो साल में हुए बाघों के हमले में जा चुकी छह लोगों की जान
संवाद न्यूज एजेंसी
बहराइच। कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार में बढ़ रही वनराज की आबादी आम लोगों के लिए जानलेवा बन गई है। जंगल का दायरा बाघों की आबादी के हिसाब से छोटा पड़ रहा है। इसी का नतीजा है कि बाघ गांवों की तरफ रूख कर रहे है और मानव जीवन को अपना शिकार बना रहे हैं।
बीत दो साल के आंकड़ों पर गौर करें तो यहां करीब छह लोगों की मौत बाघों के हमले में हो चुकी है। हालांकि वन विभाग की टीमें लोगों को वन्यजीव के हमलों से बचाव के लिए लगातार जागरूक भी करती रहती है। लेकिन इसके बाद भी लोग बाघों का निवाला बन जा रहे है। ऐसे में जंगल से सटे इलाके में रहने वाले लोगों को खुद ही सतर्क रहने की जरूरत है। बाघ के हमलो को लेकर आस पास के गांवों में रहने वाले लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
वन विभाग के आंकड़ों की माने तो इस समय कतर्नियाघाट जंगल में करीब 59 वयस्क बाघ है। इसके साथ ही करीब बाघों के बीस शावक भी मौजूद है। वैसे तो बाघ जल्दी किसी पर हमलावर नहीं होते है लेकिन यदि वह अपने शिकार की तलाश में निकलते है तो किसी को भी छोड़ते नहीं है। जंगल करीब 551 वर्ग किलोमीटर में फैला है। जबकि एक बाघ प्रतिदिन 50 से 60 किलोमीटर के दायरे में रहना पसंद करता है। इसी का नतीजा है कि बाघ जंगल से निकलकर आबादी की ओर जाकर लोगों को अपना निवाला बना रहे है। रविवार को एक युवक की बाघ के हमले में मौत के बाद अब फिर से पूरे इलाके के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। हालांकि बाघमित्र मदद करते रहते हैं।