कतर्निया घाट सेंक्चुरी में 10 दिन बाद से बाघों की गणना शुरू होगी। इसके लिए गुरुवार को ककरहा वन विश्राम गृह में वन कर्मियों को बाघ गणना की बारीकियां बताई गई। बाघ गणना के समय जंगल में आम लोगों के आवागमन पर भी पाबंदी रहेगी। इतना ही नहीं सुचारु गणना के लिए और 10 कैमरे बढ़ाए गए हैं। अब थर्मोसेंसर कैमरे 250 स्थानों पर लगाए जाएंगे।
कतर्नियाघाट सेंक्चुरी मेें विचरण करने वाले बाघों की गणना अप्रैल के अंतिम सप्ताह से शुरू होगी। इस बार गणना का कार्य वन विभाग करेगा। जबकि डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के विशेषज्ञ तकनीकी मदद करेंगे। इसके लिए गुरुवार को ककरहा वन विश्राम गृह में प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यशाला के मुख्य अतिथि मुख्य वन संरक्षक/फील्ड डायरेक्टर दुधवा नेशनल पार्क सुनील चौधरी रहे।
अध्यक्षता कतर्नियाघाट सेंक्चुरी के डीएफओ जीपी सिंह ने की। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने बताया कि कार्यशाला में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ तराई आर्कलैंड के समन्वयक डॉ. मुदित गुप्ता ने बाघ गणना को काफी संवेदनशील कार्य बताया। कहा कि गणना लगभग डेढ़ से दो माह तक चलेगी। इस अवधि में जहां कैमरे लगाएं जाएं वहां पर मानव दखलंदाजी कतई न हो।
वरिष्ठ परियोजनाधिकारी आशीष विष्टा, रोहित रवी ने थर्मो सेंसर कैमरे लगाने के तरीके, कैमरों की निगरानी और प्रतिदिन कैमरों से चिप को निकालकर उसके चित्र को सुरक्षित करने के टिप्स सुझाए। डीएफओ जीपी सिंह ने कहा कि कैमरे लगाने को 120 स्टेशन चिह्नित किए गए थे लेकिन पांच स्टेशन बढ़ने की संभावना है ऐसे में 125 स्टेशनों पर 250 थर्मोसेंसर कैमरे लगाए जाएंगे। कैमरों की सुरक्षा को एसएसबी और पुलिस से संपर्क किया गया है। प्रशिक्षण में वन क्षेत्राधिकारी पीएनराय, खुर्शीद आलम, विकास अस्थाना, आरके सिंह आदि मौजूद रहे।