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बाघिन को शावक संग तैरते देख दंग रह गए पर्यटक

Thu, 28 Jan 2016 09:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
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बहराइच। कतर्नियाघाट सेंक्चुरी में बाघिन की दहाड़ सुनना या फिर जंगल में चहलकदमी करते तो कइयों ने देखा है लेकिन बुधवार को कुछ पर्यटकों ने बाघिन का अलग अंदाज देखा तो दंग रह गए।
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वह अपने शावक के साथ गेरुआ के बैक वाटर को तैरकर पार कर रही थी। कतर्निया-गिरिजापुरी तटबंध पर ये दुर्लभ दृश्य देखते ही अमेरिकी पर्यटक मेलीसा ने इसे अपने कैमरे में कैद कर लिया। इसके अलावा सफेद चीतल के बच्चे ने भी खूब रोमांचित किया।

कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में दुर्लभ वन्यजीवों की एक झलक पाने के लिए प्रतिदिन भारी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। बुधवार को भी पर्यटक कतर्निया पहुंचे। इनमें अमेरिकन पर्यटक मेलीसा भी शामिल थीं।
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पर्यटकों के दल को गाइड चुन्नू दोपहर में जंगल की सैर करा रहा था। यह दल जब वन विभाग की जिप्सी में बैठकर कतर्नियाघाट-गिरिजापुरी तटबंध पर भ्रमण कर रहा था तभी कतर्निया तटबंध तिराहा से एक किलोमीटर पहले गाइड को बाघ की गंध महसूस हुई।

उसने तत्काल सभी को सतर्क किया। इसी बीच गेरुआ नदी के बैक वाटर में दो टाइगर दिखाई पड़े। पल भर के लिए तो पर्यटक सहम गए। लेकिन दूरबीन से देखने पर पता चला कि बाघिन अपने शावक के साथ गेरुआ नदी का बैक वाटर पार करके नदी और बैक वाटर के बीच स्थित दलदल ग्रासलैंड की ओर जा रही है।

इतने में अमेरिका की मेलीसा ने तुरंत अपना कैमरा जूम कर इस क्षण को कैमरे में कैद कर लिया। मुश्किल से चार मिनट ही बीते थे कि बाघिन और शावक ग्रासलैंड में ओझल हो गए।

पर्यटकों का रोमांच और बढ़ गया जब आधा किलोमीटर आगे बढ़ने पर तटबंध के किनारे मैला ताल झील के पास ग्रासलैंड में एक सफेद चीतल का बच्चा उछलकूद करता दिखा।

पर्यटकों ने उसकी अठखेलियां भी कैमरे में कैद कर लीं। इसके बाद रेंज कार्यालय पहुंचकर वन क्षेत्राधिकारी गयादीन से भ्रमण का अनुभव साझा किया।

डीएफओ आशीष तिवारी ने बताया कि बाघ की दहाड़ तो सुनाई पड़ सकती है लेकिन नदी या बैक वाटर में उसको तैरते देखना काफी दुर्लभ संयोग होता है। उन्होंने कहा कि वन विभाग के लिए यह सुखद क्षण है।

जींस में बदलाव से होते हैं सफेद चीतल

डीएफओ ने कहा कि जो नन्हा सफेद चीतल पर्यटकों ने देखा वह सामान्य प्रजाति का है लेकिन जीन्स में बदलाव के चलते उनके बालों का कलर चेंज हो जाता है।
 
दो दशक पूर्व पाए जाते थे सफेद हिरन

डीएफओ ने बताया कि दो दशक पूर्व कतर्निया के जंगलों में तीन चार स्थानों पर सफेद हिरन देखे जाते थे। इनमें कतर्नियाघाट और निशानगाड़ा रेंज का दलदली इलाका और ग्रासलैंड शामिल था लेकिन समय के साथ इनकी प्रजाति लुप्त हो गई थी।
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अब हिरन की ही प्रजाति के सफेद चीतल देखकर लग रहा है कि फिर से जीन्स में बदलाव से सफेद हिरन व चीतल से कतर्नियाघाट के पर्यटक रोमांचित होंगे।
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