मोतीपुर रेंज के कक्ष संख्या तीन में सोमवार दोपहर में एक बाघिन अपने शावकों के साथ पहुंच गई। रह-रह कर उसकी दहाड़ सुनाई पड़ रही है। इसके चलते आसपास की सीमा को सील कर ग्रामीणों को जंगल की ओर जाने से रोक दिया गया है। बाघिन और शावकों की निगरानी के लिए तीन टीमें गठित की गई हैं। ग्रामीणों को अलर्ट कर दिया गया है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में विचरण करने वाले बाघों का इस समय मेटिंग सीजन चल रहा है। सोमवार दोपहर में एक बाघिन अपने दो शावकों के साथ विचरण करते हुए मोतीपुर रेंज अंतर्गत कक्ष संख्या तीन के बीट संख्या 26 में पहुंच गई। आसपास के लोगों ने बाघिन को शावकों के साथ देखा तो सहम गए। तत्काल रेंज कार्यालय को सूचना दी गई।
डीएफओ आशीष तिवारी ने वन क्षेत्राधिकारी खुर्शीद आलम के साथ मौके पर पहुंचकर निगरानी की तो जंगल में कई स्थानों पर बाघिन और शावकों के पदचिह्न दिखाई पड़े। इस पर वनाधिकारियों ने भी बाघिन के शावकों के साथ क्षेत्र में मौजूद होने की पुष्टि की। मुश्किल से 20 मिनट का समय बीता होगा।
तभी काफी दूरी पर बाघिन की दहाड़ भी सुनाई पड़ी। डीएफओ ने बताया कि बाघिन के शावकों के साथ मौजूदगी की पुष्टि हुई है। इसके चलते मोतीपुर रेंज के कक्ष संख्या तीन की सीमा को सील कर दिया गया है।
आसपास के ग्रामीणों को भी अलर्ट किया गया है। डीएफओ ने बताया कि बाघिन और शावकों की निगरानी के लिए डिप्टी रेंजर रामप्यारे, एसपी सिंह और वन क्षेत्राधिकारी खुर्शीद आलम की अगुवाई में तीन टीमें गठित की गई हैं। सभी को लेजर टार्च भी मुहैया कराई गई हैं।
जंगल की ओर जाने पर होगा जुर्माना
ग्रामीणों को बाघिन के शावकों की मौजूदगी के चलते अलर्ट किया गया है। इसके बावजूद भी किसी ग्रामीण ने अगर जंगल की ओर जाने की कोशिश की तो उसे चिह्नित कर रेंज केस दर्ज किया जाएगा। जुर्माना भी होगा।
-आशीष तिवारी, डीएफओ