बहराइच। सादे स्टांप पर अंगूठा लगाने से मना करने पर महिला के सिर पर फरसा से हमला करने व उसके पति से मारपीट व जातिसूचक गाली देने के 21 साल पुराने मामले में शनिवार को अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट पवन कुमार शर्मा-द्वितीय ने दोषी अवधेश सिंह को अलग-अलग धाराओं में कुल तीन वर्ष के कारावास और 35,500 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
अभियोजन के अनुसार कैसरगंज क्षेत्र के परानापुर गांव निवासी रामसागर ने छह सितंबर 2005 को पुलिस को सूचना दी थी। आरोप था कि सादे स्टांप पर अंगूठा लगाने से मना करने पर अवधेश सिंह ने उनकी पत्नी के सिर पर फरसा से हमला कर दिया।
इसके बाद रामसागर के साथ मारपीट की और जातिसूचक गाली दी। तहरीर के आधार पर कैसरगंज थाने में संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
मामले की विवेचना तत्कालीन क्षेत्राधिकारी अजीजुल हक और क्षेत्राधिकारी जेएन तिवारी ने की। साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर पुलिस ने 29 नवंबर 2005 को अवधेश सिंह के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। अदालत ने 13 जुलाई 2006 को उसके खिलाफ आरोप तय किए।
सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने अवधेश सिंह को दोषी माना। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायालय ने तीन वर्ष का कारावास और 30 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर उसे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।