तराई में डेंगू के साथ दिमागी बुखार जानलेवा बना हुआ है। दिमागी बुखार से पीड़ित तीन और रोगियों की बुधवार को मौत हो गई। विभिन्न संक्रामक रोगों से पीड़ित और 29 रोगी भर्ती करवाए गए हैं। इनमें चार की हालत नाजुक है।
तराई का मौसम तेजी से करवट ले रहा है। नतीजा संक्रमण का प्रकोप भी तेज हो गया है। डेंगू के साथ दिमागी बुखार तराई में जानलेवा बन गया है। सीमावर्ती गांवों के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोग दिमागी बुखार की चपेट में आ रहे हैं।
महसी तहसील के करेहना बेहड़ निवासी शादाब (4) पुत्र नौशद की तबियत तीन दिन से खराब थी। उसे तेज बुखार था। परिवार के लोग निजी चिकित्सक से इलाज करा रहे थे। बुधवार दोपहर में शादाब की तबियत बिगड़ गई।
उसे तेज झटके आने लगे। इस पर परिवारीजन उसे जिला अस्पताल लेकर भागे। इलाज शुरू होने से पहले ही शादाब ने दम तोड़ दिया। इकौना थाना अंतर्गत ग्राम इकौना निवासी अनीस (8) पुत्र फजल अहमद भी बुखार की चपेट में था। जिला अस्पताल में इलाज के दौरान बुधवार सुबह इलाज के दौरान अनीस ने दम तोड़ा।
रामकुमार (28) की भी इलाज के दौरान मौत हो गई। इन्हें बुखार की शिकायत पर जिला अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों का कहना है कि रोगी बेहद गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचे थे। उधर, मंगलवार को जिला अस्पताल में बुखार, डायरिया व अन्य संक्रामक रोगों से पीड़ित और 29 रोगी भर्ती करवाए गए हैं।
इनमें लक्ष्मी (7) रायपुरराजा, वंश (1) बशीरगंज, रेहान (9) नानपारा, पूरब (1) पयागपुर की हालत नाजुक है। जिला चिकित्सालय के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा ने बताया कि बुखार के साथ तेज झटके आना दिमागी बुखार के लक्षण हैं। मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. ओपी पांडेय का कहना है कि जागरूकता से ही बचाव संभव है।