बहराइच। खैरीघाट क्षेत्र में बीते 45 दिनों से आतंक का पर्याय बनी मादा तेंदुआ अभी नरभक्षी साबित नहीं हुई है। अभी उसे मारा नहीं जाएगा। हालांकि, विभाग तेंदुए को मारने पर विचार कर रहा है। फिलहाल, तेंदुए को ट्रैंकुलाइज कर उसके शावकों के साथ जंगल में छोड़ने की तैयारी है। इसके लिए तीन रेंजों से तीन विशेषज्ञ चिकित्सक आए हैं। तीन डिवीजन के विशेषज्ञों की टीम भी तेंदुए को पकड़ने के लिए कांबिंग कर रही है।
खैरीघाट थाना क्षेत्र में शावकों के साथ घूम रही मादा तेंदुए की एक दर्जन से अधिक गांवों में दहशत बनी हुई है। तेंदुआ गन्ने के खेत के किनारे जाने वाले लोगों पर लगातार हमला कर रही है। अब तक तेंदुए ने चार लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। वह चार को घायल कर चुकी है। तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग भी लगातार प्रयासरत है, लेकिन गन्ने के घने क्षेत्र की वजह से सफलता नहीं मिल पा रही है।
वन विभाग की टीमें लगातार कर रही कांबिंग
डीएफओ संजय शर्मा ने बताया कि तेंदुए को ट्रैंकुलाइज करने के लिए पीलीभीत टाइगर रिजर्व से डॉ. दक्ष, दुधवा से डॉ. दया और लखनऊ चिड़ियाघर के डॉ. विजेन्द्र आ गए हैं। ये मौके पर तैनात हैं। लगातार हाथियों व वाहनों की मदद से कांबिंग कर रहे हैं। तेंदुए को पकड़ने के लिए तीन डिवीजन गोंडा, श्रावस्ती व कतर्नियाघाट के विशेषज्ञों की टीम भी जुटी हुई है। बहराइच डिवीजन के छह रेंजों की टीमें भी लगातार कांबिंग कर रही हैं। उन्होंने बताया कि जल्द से जल्द तेंदुआ को पकड़ने की तैयारी है।
जब कोई भी जानवर हमला करने के बाद शव को खाता है, तो नरभक्षी घोषित होता है। मादा तेंदुआ शावकों के साथ है। शावकों के आहत होने की आशंका में वह हमला कर रही है। तेंदुए को मारने का कोई आदेश नहीं है। पहला प्रयास तेंदुए को पकड़ कर जंगल में छोड़ने का है।
- संजय कुमार शर्मा, डीएफओ बहराइच