तराई में दिमागी बुखार लोगों पर लगातार भारी पड़ रहा है। इस बीमारी से मौत का सिलसिला थम नहीं रहा। जिला अस्पताल में बुखार पीड़ित दो बच्चों की शुक्रवार को मौत हो गई। एक बच्चे ने लखनऊ में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उधर बुखार से पीड़ित और 16 रोगी भर्ती हुए हैं। उनमें तीन की हालत नाजुक बताई जा रही है। इन सभी को तेज बुखार के साथ झटके भी आ रहे हैं।
तराई में दिमागी बुखार और डेंगू का कहर थम नहीं रहा है। स्वास्थ्य विभाग अंकुश लगाने का दावा तो कर रहा है लेकिन असर नहीं नहीं दिख रहा है। प्रतिदिन पीड़ितों की जान जा रही है। जिला अस्पताल में बुधवार को तेज बुखार के चलते हरदी के नथवापुर निवासी सपना (4) पुत्री पप्पू को भर्ती कराया गया था। उसे बुखार के साथ झटके आ रहे थे।
शुक्रवार सुबह सपना की हालत बिगड़ गई। कुछ देर बाद उसने दम तोड़ दिया। उधर भारत-नेपाल सीमा स्थित बर्दिया गांव निवासी छबीले (12) पुत्र किशन को तेज बुखार की हालत में परिवारीजन शुक्रवार सुबह जिला अस्पताल लेकर आए। डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखकर भर्ती करने से इंकार कर दिया।
परिवारीजन उसे लखनऊ ले जाने की तैयारी कर रहे थे तभी उसकी मौत हो गई। उधर खैरीघाट के बहादुरपुरवा निवासी पृथ्वीराज के दो वर्षीय पुत्र मन्नू का इलाज लखनऊ में चल रहा था। उसे भी दिमागी बुखार की शिकायत थी। उसने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
जिला अस्पताल में बुखार व डायरिया से पीड़ित 13 औैर रोगी भर्ती कराए गए। इनमें निधि (3) निवासी महसी, रुखसार (1) निवासी इकौना और इमरान (5) गिलौला की हालत नाजुक बताई जा रही है। जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा का कहना है कि बुखार होने पर परिवारीजन स्थानीय चिकित्सकों से इलाज कराने लगते हैं।
सही इलाज न मिलने पर रोगी की हालत बिगड़ने लगती है तो परिवारीजन उसे जिला अस्पताल लेकर आते हैं। ऐसे में जिंदगी बचाना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने हल्का बुखार होने पर भी योग्य चिकित्सक से इलाज कराने की सलाह दी।