-महसी तहसील स्थित बेलहा-बेहरौली तटबंध पर जगह-जगह रेन कट-कई स्थानों पर बने बड़े-बड़े गड्ढे, कुछ को मिट्टी डालकर पाटा
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संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच। पड़ोसी देश नेपाल के पहाड़ी नालों व नदियों के उफनाने का खामियाजा बहराइच को भुगतना पड़ता है। जिले में बाढ़ से हर साल तबाही मचती है। उपजाऊ भूमि नदी में समाहित हो जाती है। लोगों के घर भी उजड़ जाते हैं।
अभी नेपाल में मानसून सक्रिय हो गया। सुदूर पश्चिमी क्षेत्र में बारिश कहर बरपा रही है। ऐसे में जिले में भी बाढ़ की आशंका बनी हुई। बावजूद इसके यहां अभी बाढ़ से बचाव की तैयारी नाकाफी है। सैकड़ों गांवों के सुरक्षा कवच बेलहा-बेहरौली तटबंध पर जगह-जगह रेन कट हैं। रैट होल भी नजर आ रहे हैं। ठोकरों का काम भी अधूरा है। यह सुस्ती बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में मुसीबत का कारण बन सकती है।
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बेलहा-बेहरौली तटबंध की मरम्मत जरूरी
महसी/बौंडी। कैसरगंज, नानपारा व महसी तहसील क्षेत्र के सैकड़ों गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए वर्ष 1956 में नानपारा के बलहा से कैसरगंज के जरवल के बेहरौली तक करीब 95 किमी लंबा बेलहा बेहरौली तटबंध बनाया गया था, जिसके रखरखाव पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इन दिनों इस पर कई स्थानों पर रेन कट बने हुए हैं। मंगलवार को तटबंध के भगवानपुर से किसानगंज तक की पड़ताल की गई। इस दौरान भगवानपुर से किसानगंज तक तटबंध में दर्जनों रेन कट मिले। कई स्थानों पर रेन कट से बड़े गड्ढे दिखे। टिकुरी गांव निवासी धर्मेंद्र शुक्ला ने बताया कि बारिश के कारण तटबंध पर दर्जनों गड्ढे हो गए थे, जिनमें एक दिन पूर्व ही मिट्टी डाली गई है। बौंडी बंधा मोड़ से बंदरहा बाबा, गोलागंज व कायमपुर तक बांध पर भी एक दर्जन से अधिक स्थानों पर रेन कट मिले हैं। यहां भी सिर्फ कुछ स्थानों पर मिट्टी पड़ी मिली।
सरयू व घाघरा की तबाही से बचाने के कार्य में ढिलाई मिहींपुरवा। तहसील क्षेत्र में नेपाल के पहाड़ों से आने वाले नाले व नदियों का पानी सबसे पहले तबाही मचाता है। तहसील क्षेत्र की दो लाख की आबादी बाढ़ की विभीषिका झेलती है, लेकिन सरकार द्वारा करोड़ों खर्च करने के बाद भी बाढ़ से बचाव की तैयारी नाकाफी नजर आती है। घाघरा नदी से आम्बा, विशुनापुर, फकीरपुरी, चहलवा, जंगल गुलरिहा, सुजौली, बडखडिया, महराज सिंह व सरयू नदी करमोहना, नौकापुरवा, पडरिया, सर्राकला, बखारी, पौंडा, मजगवा गांवों में भीषण तबाही मचाती है। सिंचाई विभाग बाढ़ खंड द्वारा ठोकर व स्पर के नाम पर करोड़ों खर्च किए जाने के बाद भी बाढ़ नहीं रुकती। बीडीओ मिहीपुरवा अजीत कुमार सिंह ने बताया कि प्रभावित गांवों में नाव की व्यवस्था है। लगभग 150 नावें हैं व गोपिया बैराज पर बाढ़ शिविर केंद्र शेड बनाया गया है।
संभावित बाढ़ को देखते हुए तटबंधों को मजबूत करने का काम किया जा रहा है। अफसरों की टीम लगातार बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं पर नजर बनाए है।-मोनिका रानी, डीएम