रात आठ बजे से चांद के प्रथम दर्शन के लिए सुहागिनें रह-रहकर आकाश की ओर निहारती रहीं। जैसे ही चांद दिखाई पड़ा सुहागिनें निहाल हो गईं। चलनी की ओट से अक्षय सुहाग की कामना करते हुए परंपरा के तहत अर्ध्य देकर पति की लंबी उम्र और परिवार के सुख-समृद्धि की प्रार्थना की।
करवा चौथ शुक्रवार को गांव, शहर और कस्बों में परंपरागत तरीके से मना। पूरे दिन सुहागिनों ने निराजल व्रत रखा। शाम होते ही चांद के दीदार के लिए सुहागिनें उत्साहित रहीं। ग्रामीण अंचलों में महिलाओं ने दीवार पर करवा बनाकर चौथ पूजन की परंपरा निभाई।
वहीं शहर व कस्बो में करवा चौथ का कैलेंडर खरीदकर महिलाओं ने पूजा की परंपरा का निर्वहन किया। रात आठ बजते ही आसमान में चांद की एक झलक पाने के लिए सुहागिनें बेकरार हो उठीं।
रात 08:04 बजे के आसपास जब आसमान में चौथ का चांद दिखाई पड़ा तो सुहागिनें खुशी से उछल पड़ीं। सभी महिलाएं सुहाग के जोड़े में नजर आ रही थीं। पूरा शृंगार कर आनन फानन में सभी ने भगवान शिव व पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
इसके बाद चलनी की ओट से चांद का दीदार कर अर्ध्य देते हुए अक्षय सुहाग और परिवार की खुशहाली बरकरार रहने के लिए प्रार्थना की। इसके बाद सुहागिनों ने पति के साथ ही घर के बड़े बुजुर्गों का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। फिर जल ग्रहण कर पारण किया।
मायके तो किसी ने ससुराल में किया चांद का दीदार
करवा चौथ की पूजा नव विवाहिताओं के लिए सुखद अनुभव रहा। कुछ ने मायके में तो कुछ ने ससुराल में परंपरा के मुताबिक चांद का दीदार कर पति की लंबी उम्र की कामना कर पूजा अर्चना करते हुए परंपरा का निर्वहन किया।