बहराइच। सातवीं आर्थिक गणना का कार्य शुरू होने वाला है। इसके लिए नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों में जिले को बांटा गया है। पहली बार मोबाइल एप के माध्यम से गणना का काम होगा। गणना के लिए 1054 पर्यवेक्षक लगाए जा रहे हैं तो गणना का काम करने के लिए 3314 प्रगणक भी लगाए जाएंगे। जियो टैगिंग के माध्यम से मकानों का सर्वे होगा। कल-कारखानों की भी गणना कराई जाएगी।
सातवीं आर्थिक गणना का कार्य शुरू होने वाला है। यह गणना अगले सप्ताह से शुरू करने की तैयारी है। आर्थिक गणना के काम के लिए प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को लगाए जाने की तैयारी की जा रही है। आर्थिक गणना कराये जाने के लिए जनपद में कुल 1054 ग्रामीण क्षेत्र एवं 19 नगरीय क्षेत्र बनाये गये हैं।
लक्ष्य 1054 पर्यवेक्षकों के सापेक्ष 513 तथा 3314 प्रगणकों के सापेक्ष 2009 का चयन भी कर लिया गया है। चयनित प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण जिला स्तर एवं तहसील व विकास खंड स्तर पर करा लिया गया है। गणना का काम किए जाने के लिए सभी क्षेत्रों की मैपिंग भी कराई जा रही है। जिससे कोई भी क्षेत्र सर्वेक्षण से छूट न पाए। सर्वेक्षण कार्य में लगाये जाने वाले प्रगणकों के सर्वेक्षण क्षेत्रों को भी बांटा जा रहा है।
बैठक के दौरान जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी डॉ. अर्चना सिंह ने बताया कि सातवीं आर्थिक गणना का कार्य पहली बार मोबाइल एप के माध्यम से किया जायेगा। सर्वेक्षण के समय प्रत्येक परिवार व मकान की जियो टैगिंग की जाएगी। इसी के साथ कल-कारखानों की गणना भी की जाएगी।
जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी ने बताया कि आर्थिक गणना के आंकड़े एकत्र करने एवं प्रथम स्तर का पर्यवेक्षणीय कार्य सीएससी की तरफ से चयनित प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों के माध्यम से किया जायेगा। द्वितीय स्तर पर आठ प्रतिशत के पर्यवेक्षण का कार्य अर्थ एवं संख्या तथा उद्योग विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों की ओर से तथा दो प्रतिशत राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय के क्षेत्रीय अधिकारियों की ओर से किया जायेगा।
कार्ययोजना बनाकर करें काम
डीएम शंभु कुमार ने आर्थिक गणना के सर्वेक्षण कार्य का पर्याप्त प्रचार-प्रसार कराये जाने का निर्देश देते हुए आम जनमानस को आर्थिक गणना सर्वेक्षण से जोड़ने की बात कही है। आर्थिक गणना कार्य को ठीक ढंग से कराने के लिए संस्था को ठोस रणनीति व कार्ययोजना उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर सीएससी को प्रभावी अनुश्रवण करते रहने के निर्देश दिये हैं।
बिना नेटवर्क करेगा काम
जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी अर्चना सिंह ने बताया कि जियो टैगिंग के लिए नेटवर्क की आवश्यकता नहीं होगी। यह ऑफ लाइन भी चालू रहेगा। सबसे बड़ी बात रहेगी कि जब भी नेटवर्क आएगा, संबंधित सूचना अपने आप ही अपलोड हो जाएी। इसकी जिम्मेदारी कामन सर्विस सेंटर को दी गयी है।