अगर बुखार है और डॉक्टर की लिखी दवा की पर्ची देखकर दुकानदार या फार्मासिस्ट ने उल्टी, दस्त की दवा दे दी तो रोग ठीक होने के बजाए बिगड़ जाएगा। इसे डॉक्टर की गलती कहें या फार्मासिस्ट की। गलती किसी की भी हो लेकिन भुगतता रोगी है। ऐसा ही मामला जिला अस्पताल के वरिष्ठ चर्मरोग विशेषज्ञ से जुड़ा है।
डॉक्टर ने पर्चे पर कौन सी दवाएं लिखी हैं, उसे पढ़ने में अस्पताल के कई डॉक्टर व फार्मासिस्ट चकरा गए। यहां तक कि सीएमएस को भी पढ़ने में दिक्कत हुई। यह पर्ची सोशल मीडिया पर भी वायरल वायरल हुई तो अन्य फार्मासिस्ट की मदद से मरीज को दवा मिल सकी।
जिला अस्पताल में कार्यरत डॉ. मुकेश कुमार जिंदल चर्म रोग विशेषज्ञ हैं। गत सात सितंबर को खलीकुन (50) ने डॉ. मुकेश को दिखाया। उन्हें चर्म रोग की शिकायत थी। डॉक्टर मुकेश ने दो दवाओं के नाम लिखे जिसे जिला अस्पताल के दवा काउंटर के फार्मासिस्ट भी नहीं पढ़ पाए।
उसने अन्य फार्मासिस्टों की मदद से मरीज खलीकुन को दवा दी। इसी बीच फार्मासिस्ट ने दवा की पर्ची की फोटो खींचकर उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दी। यह पर्ची डॉक्टरों व फार्मासिस्टों के व्हाट्स एप या फेसबुक वॉल पर पहुंच रही है और उसका मखौल उड़ाया जा रहा है।
जिले में डॉक्टर मुकेश की तरह ही कई ऐसे डॉक्टर हैं जिनकी लिखावट समझ नहीं आती जबकि यह मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के निर्देशों का उल्लंघन है और अदालत के निर्देशों की अवमानना भी है।
पर्ची देखने के बाद अस्पताल के सीएमएस डॉ. माहेश्वरी पांडेय को भी समझने व पढ़ने में दिक्कत हुई। हालांकि कुछ देर बाद उन्होंने दवाओं के दो नाम टीएमपी व सिटरजिन बताया। कहा कि डॉक्टर मुकेश ने दवाओं के नाम लिखने के बाद उसके नीचे लाइन खींची है।
टीएमपी एंटीबायोटिक है जबकि सिटरजिन एंटी एलर्जिक। बताया कि दोनों दवाएं अस्पताल की हैं। कहा कि अस्पताल के सभी डॉक्टरों को स्पष्ट लिखावट में दवाएं लिखने का निर्देश दिया गया है। इस संबंध में जब डॉ. मुकेश जिंदल का पक्ष जानने के लिए फोन मिलाया गया तो घंटी बजी, लेकिन उन्होंने फोन काट दिया।