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पीपीपी मोड पर चलेगा नया जच्चा-बच्चा अस्पताल

Wed, 28 Oct 2015 10:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
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महिला अस्पताल परिसर में बन रहे 100 बेडों के जच्चा-बच्चा अस्पताल को सरकार ने पीपीपी (पब्लिक प्राईवेट पार्टनरशिप) मोड पर चलाने का निर्णय लिया है। अस्पताल के संचालन का खर्च सरकार उठाएगी, लेकिन काम निजी क्षेत्र करेंगे। दावा है कि आम जनता पर इलाज का कोई बोझ नहीं पड़ेगा।
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इस कदम से महिला अस्पताल का कायाकल्प हो जाएगा। मेडिकल व पैरामेडिकल स्टाफ की कमी भी दूर होगी। आम जनता ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है। जिला महिला अस्पताल में अब तक महज 90 प्रसूताओं को भर्ती करने की व्यवस्था है।

साथ ही ऑपरेशन थिएटर, अल्ट्रासाउंड, पैथोलोजी, एमटीपी, नसबंदी आदि सुविधाएं मौजूद हैं। तकरीबन दो साल पूर्व स्वास्थ्य महकमे के प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए शासन ने 100 बेड के नए जच्चा-बच्चा अस्पताल के निर्माण को मंजूरी दी थी। 19 करोड़ 99 लाख 82 हजार की लागत से कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम ने अस्पताल का निर्माण गत वर्ष 24 फरवरी को शुरु किया था।
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23 फरवरी 2016 तक भवन बनकर तैयार होने की घोषणा की गई है। यहां अर्श क्लीनिक, प्रसव कक्ष, आईसीयू, प्राइवेट वार्ड, चिल्ड्रेन वार्ड, ऑपरेशन थिएटर समेत अत्याधुनिक सुविधा मिलेगी। अब इस नए अस्पताल को सरकार ने निजी हाथों को सौंपने का निर्णय लिया है। इसके पीछे स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया व विशेषज्ञ डॉक्टरों का न मिल पाना एक मुख्य वजह माना जा रहा है।

यदि अस्पताल के संचालन की जिम्मेदारी निजी हाथों की कमान में होगी तो डॉक्टर व विशेषज्ञों का इंतजाम खुद करना होगा। अस्पताल के रखरखाव व साफ सफाई की व्यवस्था सुधरेगी। रोगियों का इलाज भी सरकारी खर्च में प्राइवेट तरीके से हो सकेगा।

महिला अस्पताल में चिकित्सा अधिकारी के 13 पद स्वीकृत हैं, लेकिन यहां नौ कार्यरत हैं। इसी तरह चीफ फार्मासिस्ट के चार पदों के सापेक्ष तीन कार्यरत हैं। फार्मासिस्ट व स्टाफ नर्स के स्वीकृत पदों के सापेक्ष स्टाफ कार्यरत हैं। लेकिन अधिकतर संविदाकर्मी हैं।

प्री-मेच्योर या सेप्टीसीमिया बीमारियों में नवजात शिशुओं के लिए राहत देने के लिए महिला अस्पताल में सिक न्यूबॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) यानी गंभीर नवजात शिशु उपचार इकाई की स्थापना होगी। इस पर 19 लाख 58 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। 12 शैय्याओं वाले गंभीर नवजात शिशु उपचार इकाई को क्रियाशील बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग तीन बाल रोग विशेषज्ञ व छह स्टॉफ नर्स की जरूरत होगी।

अर्श क्लीनिक व एसएनसीयू के अलावा लेबर रूम, प्री डिलेवरी वेटिंग बेड, पोस्ट डिलीवरी ऑब्जरवेशन रूम, तीस-तीस बेड का एनसी व पीएनसी वार्ड, 15 बेड का पीडियाट्रिक वार्ड, दो बेड का हाई डिपेंडेसी यूनिट, छह बेड का आईसीयू वार्ड, 10 बेड का प्राइवेट वार्ड, दो-दो बेड का मेजर व माइनर ऑपरेशन थिएटर, ब्लड स्टोरेज यूनिट, दो डॉक्टर ड्यूटी रूम, ट्रेनिंग हॉल, स्क्लि स्टेशन, ओपीडी, पैंट्री, एंबुलेंस ड्राइवर रूम, हेल्प डेस्क, आशा गृह, रिकार्ड रूम, दो ऑफिस बनाए जाएंगे।

हुजूरपुर निवासी ज्योति सिंह का कहना है कि नए अस्पताल से यहां सुविधाएं बढ़ जाएंगी। गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान समस्या आने पर अब उन्हें लेकर लखनऊ नहीं भागना पड़ेगा। समय पर डॉक्टर व इलाज भी मिलेगा। महमतपुर कला गांव निवासी ज्ञानवती ने कहा कि नवजात शिशुओं का बेहतर तरीके से इलाज होगा। लेकिन निजी क्षेत्र मरीजों का आर्थिक शोषण भी कर सकते हैं। इसकी मॉनीटरिंग के लिए सरकार को व्यवस्था करनी चाहिए।

मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका डॉ. मधु गैरोला का कहना है कि जिला महिला अस्पताल को स्टॉफ की कमी से जूझना पड़ रहा है। जितने स्त्री रोग विशेषज्ञ व विशेषज्ञ डॉक्टर चाहिए, वे नहीं मिल पा रहे हैं। पीपीपी मोड पर अस्पताल के संचालन से स्टॉफ की कमी दूर हो जाएगी। जिससे महिलाओं को समय पर इलाज मिलेेगा।
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