लखनऊ में छात्र की मौत के बाद पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद पिता व अन्य परिजन।
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चाय बेचकर परिवार का पालन पोषण कर रहे प्रेम बिल्लो का सपना था कि उसका इकलौता बेटा बड़ा होकर आईएएस बनेगा। इसीलिए उन्होंने ठाना था कि उनका बेटा गांव के छोटे स्कूल में न पढ़कर शहर के कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ेगा। वे बीमार होने के बाद भी चाय बेंचकर पैसा कमाने की जुगत में लगे रहे, लेकिन शायद खुदा को यह मंजूर न था और बुधवार को स्कूल में हुए झूला गिरने के हादसे में प्रतीक की मौत हो गई। प्रतीक की मौत की सूचना पर पिता बेहोश हो गया और होश आने पर सिर्फ एक ही बात उसके मुंह से निकल रही थी कि मेरा अरमान व मेरी जान अब निकल गई। मेरा जिंदा रहना बेकार है। अब हम किसके लिए मेहनत करेंगे। इकलौते बेटे की मौत के बाद पिता सदमे में है।
हर मां-बाप का सपना होता है, कि उनका बेटा उनसे ज्यादा तरक्की करे और उनका नाम रोशन करे। साथ ही जो दुख-दर्द उन्होंने झेला है, उसकी परछांई भी उसकी औलाद पर न पड़े। कुछ ऐसा ही सपना देखा था, जिला मुख्यालय से लगभग 110 किलोमीटर दूूर स्थित थारु जनजाति बाहुल्य गांव विशुनापुर निवासी प्रेम बिल्लो ने। प्रेम बिल्लो ने बचपन में बहुत की दुख झेला था। इसी कारण वह अपने इकलौते बेटे प्रतीक(7) को दुनिया की हर खुशी देना चाहते थे। इसलिए उन्होंने खुद गांव में चाय की टपरी खोल कर मेहनत शुरू की। उन्होंने अपने बेटे प्रतीक का दाखिला शहर के जाने माने स्कूल सिटी मांटेसरी इंटर कॉलेज में करवाया। ताकि उनका बेटा बड़ा होकर उनकी जैसी यातनाएं न झेले और आईएएस अधिकारी बन उनका और गांव का नाम रोशन करे। लेकिन विद्यालय प्रबंधन की हल्की सी चूक ने उनके सपने और घर के चिराग को बुझा दिया।
बुधवार को स्कूल में झूला गिरने से उसके नीचे दबकर मासूम प्रतीक की मौत हो गई। वहीं स्कूल प्रबंधन ने उन्हें फोन कर घटना की जानकारी देना भी उचित नहीं समझा। शहर के नौव्वागढ़ी में रहने वाली मृतक की मौसी पार्वती ने फोन पर प्रेम बिल्लो को इकलौते बेटे के मरने की सूचना दी। जिसके बाद प्रेम अचेत होकर गिर पड़ा। काफी देर बाद जब होश भी आया तो पिता सिर्फ एक ही बात कह रहा था कि काश मेरा बेटा मेरे ही पास होता। कम से कम मेरी आंखों के सामने होता और जिंदा होता। हादसे के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है।
मौसी भी घंटे-घंटे पर हो रही अचेत
सात वर्षीय मृतक प्रतीक अपनी मौसी पार्वती के साथ रहकर पढ़ाई कर रहा था। उसके साथ उसकी सगी बहन संज्योती जो कक्षा तीन की छात्रा है, वह भी रहती है और सिटी मांटेसरी स्कूल में ही पढ़ती है। दोनों बच्चों को साथ रखकर पढ़ाने वाली उसकी मौसी पार्वती खुद केडीसी में बीए की छात्रा है। हादसे के दिन प्रतीक के घायल होने की सूचना पर मौसी पार्वती भी अचेत होकर गिर गई। वहीं हादसे के बाद से वह लगातार हर कुछ घंटे पर बेहोश होकर गिर रही है। मौसी से हादसे के संबंध में बात की गई, तो उन्होंने बताया कि विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही ने सब कुछ छीन लिया। प्रतीक के पापा प्रेम बिल्लो के सारे त्याग को एक झटके में खत्म कर दिया। उन्होंने लापरवाही प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।