एक बार फिर महसी और कैसरगंज क्षेत्र में बाढ़ की दुश्वारियां शुरू हो गई हैं। इसके साथ ही ककहरे के स्वर भी मंद हो गए हैं। पेड़ों के नीचे बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। गौरतलब हो कि अब तक 15 स्कूलों का अस्तित्व घाघरा नदी की लहरों ने खत्म कर दिया है। जिससे न सिर्फ छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बाधित है, बल्कि व्यवस्थाओं पर भी उंगलियां उठ रही हैं।
बाढ़ क्षेत्र में आम जनजीवन तो प्रभावित होता ही है, शिक्षा व्यवस्था भी चौपट हो जाती है। कुछ यही स्थिति महसी और कैसरगंज क्षेत्र में दिख रही है। घाघरा नदी की लहरें गांव और घरों के साथ स्कूलों को भी निशाना बनाती हैं। दो दिन पूर्व कायमपुर का परिषदीय विद्यालय नदी की भेंट चढ़ा गया था। इसके पहले सुकईपुर के प्राथमिक विद्यालय को नदी की लहरें लील चुकी हैं। जिससे अब इन दोनों स्कूलों में अध्ययनरत करने वाले छात्रों के सामने पठन-पाठन की समस्या है।
कायमपुर में 107 व सुकईपुर में 186 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। यह सभी कायमपुर गांव में देशराज सिंह के मकान के पास पेड़ के नीचे लग रहे स्कूल में पढ़ने को विवश हैं। इन दो स्कूलों के अलावा 13 और स्कूल बीते डेढ़ दशक में घाघरा की लहरों की भेंट चढ़ चुके हैं। इनमें 10 प्राथमिक विद्यालय व तीन जूनियर विद्यालय शामिल हैं। उन स्कूलों के छात्र-छात्राएं दूसरे स्कूलों से संबद्ध हैं। पढ़ाई की सिर्फ औपचारिकता निभ रही है।
प्राथमिक विद्यालय : घोंघा कोड़र, चौहाननपुरवा, खरखट्टनपुरवा, बाहरपुर, मुंसारी प्रथम, मुंसारी द्वितीय, मुरौवा बाजार, कपरवल, कायमपुर, सुकईपुर। जूनियर विद्यालय बांसगढ़ी, मुरौवा, चौहाननपुरवा, मंगरवल, कायमपुर में स्थित स्कूल भवनों का अस्तित्व खत्म हो चुका है।
घाघरा नदी की कटान में जो 15 स्कूल समाहित हुए हैं। उनमें दो प्राथमिक व दो जूनियर विद्यालयों के निर्माण को शासन ने अनुमति दे दी है। इनमें बाहरपुर, मुरौवा बाजार, मुरौवा जूनियर विद्यालय व चौहाननपुरवा जूनियर विद्यालय शामिल हैं।