कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती रविवार को श्रीलंकाई अनुयायियों से गुलजार रही। उन्होंने गंध कुटि में भगवान बुद्ध की प्रतिमा रख विशेष प्रार्थना की। इस दौरान दल के सदस्यों ने विश्व शांति की कामना की।
विशेष पूजा के दौरान माता सुमेदा थेरों ने कहा कि बौद्ध दर्शन का अभिप्राय उस दर्शन से है, जो भगवान बुद्ध के निर्वाण के बाद बौद्ध धर्म के विभिन्न संप्रदायों द्वारा विकसित किया गया। दुख से मुक्ति बौद्ध धर्म का सदा से मुख्य ध्येय रहा है। कर्म, ध्यान व प्रज्ञा इसके साधन रहे हैं। बुद्ध के उपदेश तीन पिटकों में संकलित हैं। यह सुत्त पिटक, विनय पिटक और अभिधम्म पिटक कहलाते हैं। उन्होंने कहा कि क्रियाशील सत्य की धारणा बौद्ध मत की मौलिक विशेषता है। बुद्ध के अनुसार परिवर्तन ही सत्य है। पश्चिमी दर्शन में हेराक्लाइटस और बर्गसां ने भी परिवर्तन को सत्य माना। इस मौके पर काफी संख्या में बौद्ध भिक्षु व उपासक मौजूद रहे।