श्रावस्ती। नाबालिग के साथ दुराचार करने के मामले में न्यायालय ने एक आरोपी को दस वर्ष कारावास के साथ अर्थदंड की सजा सुनाई। घटना 15 वर्ष पूर्व भिनगा कोतवाली क्षेत्र में घटी थी।
कोतवाली क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने 2007 में तहसील दिवस में एक शिकायती पत्र दिया था। जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी नाबालिग बेटी को बड़कऊ विश्वकर्मा बहला-फुसलाकर भगा ले गया है। कोतवाली में शिकायत की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने बाद में फोन से पता चला कि बेटी बहराइच के डिगिहा चौराहे के पास है। वहां जाकर उन्होंने पीपल चौराहे के पास से बेटी को खोज निकाला था। मौके से आरोपी भाग गया था। शिकायत के बाद तहसील दिवस में बैठे अधिकारियों ने मामला दर्ज करने का आदेश जारी किया था। जिसकी सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश उमेश कुमार ने आरोपी को दोषी मानते हुए दस वर्ष सश्रम कारावास के साथ 35 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।