जिले में गेहूं खरीद शनिवार से शुरू हो गई। पहले दिन क्रय केंद्रों पर पूरी तरह से सन्नाटा पसरा रहा। क्रय केंद्रों पर किसान अपना गेहूं लेकर बेचने को ही नहीं पहुंचे। इससे क्रय केंद्रों पर कर्मचारी सुबह से ही हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। अधिकारी एक सप्ताह बाद ही बाजार में गेहूं के बिकने के आने की संभावना जता रहे हैं।
मूल्य समर्थन योजना के तहत गेहूं की खरीद करने के लिए जनपद के 105 स्थानों पर शनिवार को क्रय केंद्र खोल दिए गए। बैनर टांगने के साथ ही केंद्र प्रभारी और कर्मचारी भी केंद्रों पर पहुंच गए। गेहूं खरीद के लिए शासन की ओर से बोरे और रुपये भी केंद्रों को उपलब्ध करा दिए गए हैं। लेकिन केंद्रों पर पहले दिन पूरी तरह से सन्नाटा पसरा रहा।
केंद्र प्रभारी सुबह दस बजे से ही केंद्रों पर बैठकर किसानों का इंतजार करते दिखे। बहराइच के गल्ला मंडी में स्थापित पांच क्रय केंद्रों पर कोई भी किसान अपनी उपज बेचने को नहीं पहुंचा। यहां के केंद्र प्रभारी कपिल कुमार ने बताया कि केंद्र पर सुबह से वह बैठे रहे, लेकिन पहले दिन किसी किसान ने अपने गेहूं की तौल नहीं कराई है।
कुछ किसान केंद्र पर आए जरूर थे। वहीं नानपारा और रिसिया में भी क्रय केंद्रों पर यही हालात रहे। इस बारे में डिप्टी आरएमओ का कहना है कि बेहतर फसल पैदा हुई है। लेकिन किसानों का गेहूं अभी खलिहान में लगा है। उम्मीद है कि अगले सप्ताह से केंद्रों पर किसान गेहूं लेकर पहुंचने शुरू हो जाएंगे।
गल्लामंडी के पंजीकृत व्यापारियों की दुकानों पर गेहूं की तौल होती देखी गई। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अगेती गेहूं की बोआई करने वाले किसानों ने अपनी उपज को व्यापारियों के हाथ बेचा होगा। वहीं कुछ किसानों का कहना है कि बैंक खाते में धनराशि जाने के झंझट से बचने के लिए नकद मूल्य पर उपज बेचना सरल होता है।