फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डॉक्टरों की हड़ताल से ठप रहीं सेवाएं, भटकते रहे मरीज

विज्ञापन
विज्ञापन
बहराइच। केंद्र सरकार के नियम के विरुद्ध निजी चिकित्सालयों की ओर से शुक्रवार को घोषित हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएं ठप रहीं। हड़ताल कर निजी अस्पतालों ने कई ऑपरेशन टाल दिए। निजी अस्पतालों में सभी जगह सन्नाटा पसरा दिखा। निजी अस्पतालों में सेवाएं ठप होने से मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ा। मरीज इलाज के लिए इधर-उधर भटकते रहे। आईएमए के मुताबिक सिर्फ इमरजेंसी केस ही लिए गए।
विज्ञापन

केंद्र सरकार ने आयुर्वेदिक व यूनानी चिकित्सकों को ऑपरेशन करने के लिए कानून बनाया है। इसका इंडियन मेडिकल एसोसिएशन विरोध कर रहा है। आईएएम ने कानून को वापस लेने के लिए आठ दिसंबर को दो घंटे के लिए पूरे देश में सांकेतिक आंदोलन किया था लेकिन आईएमए की मांग नहीं मानी गई। इस पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के निर्देशन में शुक्रवार को पूरे दिन सांकेतिक हड़ताल की गई। हड़ताल के चलते ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीजों को नर्सिंगहोम में भर्ती नहीं किया गया, जिससे मरीज मायूस होकर लौट गए। मरीजों को अस्पताल में भर्ती न करने से निजी अस्पतालों के बाहर सन्नाटा पसरा रहा। मरीज इलाज के लिए इधर-उधर भटकते रहे।
आईएमए की जिलाध्यक्ष डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी ने कहा कि आईएमए मेडिकल शिक्षा में खिचड़ी तंत्र लाने का पूर्ण रूप से विरोध करती है। अध्यक्ष ने कहा कि एक दिवसीय पूर्ण हड़ताल के दौरान किसी भी अस्पताल में वाह्य रोगी विभाग का संचालन नहीं हुआ। सिर्फ इमरजेंसी सेवाएं ही चालू थीं। इससे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। आईएमए के सचिव डॉ. अरविंद शुक्ला ने कहा कि हम सभी पूरी मेहनत से पढ़ाई करके यहां तक पहुंचे हैं। अब सरकार आयुर्वेदिक चिकित्सकों को भी ऑपरेशन का जिम्मा दे रही है। यह हम लोगों के साथ अन्याय है। हम सभी इस कानून का विरोध करते हैं। वरिष्ठ सर्जन डॉ. सर्वेश शुक्ला ने कहा कि ऑपरेशन योग्य चिकित्सकों की ओर से ही किया जाता है, लेकिन सरकार ने इस कानून को पारित कर उसे खेल समझ लिया है। इसका हम सभी विरोध करते हैं। डॉ. गयास अहमद ने भी सरकार के इस कानून का विरोध किया।
विज्ञापन

मरीजों को नहीं हुई परेशानी
आईएमए की ओर से शुक्रवार को एक दिवसीय हड़ताल थी, लेकिन इससे मरीजों को कोई परेशानी नहीं हुई। प्राइवेट अस्पताल जाने वाले मरीज सरकारी अस्पताल में पहुंचे। उनका इलाज कर दवाइयां दी गईं। यही हाल जिले के सीएचसी और पीएचसी पर भी रहा।
विज्ञापन

डॉ. राजेश मोहन श्रीवास्तव, सीएमओ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें