बहराइच। सरयू नदी के बढ़ते जलस्तर ने महसी तहसील के गांवों में मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। मंगलवार को एल्गिन ब्रिज पर सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से 48 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। बैराजों से करीब 3.59 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नदी का दबाव लगातार बढ़ रहा है। हालात यह हैं कि पहले रास्तों और खेतों में पहुंचा बाढ़ का पानी अब घरों और अहातों में घुसने लगा है। पहले से बाढ़ से घिरे 24 गांवों के बाद मंगलवार को छह और गांव पानी की जद में आ गए। इसके साथ ही प्रभावित गांवों की संख्या करीब 30 हो गई है। बाढ़ से 95 हजार से अधिक आबादी प्रभावित बताई जा रही है।
महसी तहसील की पूरे प्रसाद और पूरे सीताराम ग्राम सभा के अहिरनपुरवा, त्यागीपुरवा, गलकारा, टंच जंगल, महंतपुरवा, जोधेपुरवा समेत दर्जनों गांवों में स्थिति लगातार बिगड़ रही है। कई घरों और अहातों में पानी भर गया है। गांवों को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग भी जलमग्न हो गए हैं। महंतपुरवा, जोधेपुरवा, अहिरनपुरवा, तुरंतीपुरवा, गोलांगज कोठार, पिपरा और पिपरी समेत कई गांवों में कहीं घुटनों तक तो कहीं कमर तक पानी भर गया है। रास्ते डूब जाने से ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित है। पानी से घिरी कई बस्तियां टापू जैसी दिखाई दे रही हैं।
मवेशियों के लिए भी सुरक्षित जगह नहीं
बाढ़ का असर केवल ग्रामीणों के घरों तक सीमित नहीं है। अहिरनपुरवा, यादवपुरी समेत आसपास के गांवों में मवेशियों के बैठने तक की जगह नहीं बची है। ग्रामीणों के मुताबिक, कई मवेशी दिन-रात पानी के बीच रहने को मजबूर हैं। पानी बढ़ने के साथ पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था करना भी कठिन होता जा रहा है। तहसीलदार विपिन चौरसिया ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है। जरूरत के अनुसार ग्रामीणों तक सहायता पहुंचाने के लिए चार नाव और दो स्टीमर लगाए गए हैं। राजस्व टीमें भी लगातार प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर स्थिति का जायजा ले रही हैं।
घरों में पानी, चारपाई पर चूल्हा
घरों में पानी पहुंचने के बाद ग्रामीणों के सामने खाना पकाने और पीने के पानी की समस्या सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। कई घरों में चूल्हे पानी में डूब गए हैं। ऐसे में लोग चारपाई पर ईंटें रखकर चूल्हा ऊंचा कर किसी तरह भोजन तैयार कर रहे हैं। घर के भीतर रखा सामान भी पानी से बचाना मुश्किल हो रहा है। बच्चों और बुजुर्गों की परेशानी सबसे अधिक है।गलकारा-अहिरनपुरवा निवासी मायादेवी और जानकी ने बताया कि बाढ़ ने घर के साथ पूरी दिनचर्या अस्त-व्यस्त कर दी है। बच्चों का पेट भरने के लिए चूल्हा जलाने की जगह तक नहीं बची है।
पानी के साथ सांप-बिच्छू का डर
बाढ़ के पानी के साथ जहरीले जीवों का खतरा भी बढ़ गया है। तुरंतीपुरवा निवासी बाबादीन और अहिरनपुरवा निवासी राम दुलारे के मुताबिक, पानी भरने के बाद घरों में सांप और बिच्छू निकल रहे हैं। परिवार के लोग बच्चों और बुजुर्गों की निगरानी के लिए रात में भी जाग रहे हैं। ग्रामीणों के सामने एक ओर घर में घुसा पानी है तो दूसरी ओर जहरीले जीवों का डर बना हुआ है।
दिन में पानी से जंग, रात में अंधेरे से संघर्ष
बाढ़ प्रभावित गांवों में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। रात होते ही पानी से घिरे गांव अंधेरे में डूब जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर सोलर पैनल भी काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में दिनभर बाढ़ के पानी से जूझने के बाद रात अंधेरे और डर के बीच गुजारनी पड़ रही है। सांप-बिच्छू के खतरे के बीच रोशनी का अभाव चिंता और बढ़ा रहा है।
खाना, पानी, चारा और दवाओं का संकट
बाढ़ के बीच ग्रामीणों के सामने सिर्फ घरों में पानी भरने की समस्या नहीं है। पीने का पानी, भोजन, पशुओं का चारा, जरूरी दवाएं और शौचालय जैसी मूलभूत जरूरतों का संकट भी गहराता जा रहा है। जलस्तर बढ़ने के साथ पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखना और उनके लिए चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो रहा है। महंतपुरवा निवासी सुमिरन का कहना है कि स्थिति गंभीर होने के बावजूद प्रभावित गांवों में राहत सामग्री पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच रही है। उनका आरोप है कि राहत व्यवस्था कागजों में सक्रिय दिखाई दे रही है, लेकिन गांवों में पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखने वाला कोई नहीं है।
224 बाढ़ पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री
महसी तहसील के चार मजरों समेत पूरे प्रसाद के 224 बाढ़ पीड़ित परिवारों को मंगलवार को राहत सामग्री वितरित की गई। तहसील महसी के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में नानपारा चीनी मिल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर अखंड प्रताप सिंह ने प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई। कार्यक्रम में उप जिलाधिकारी महसी राजेश कुमार अग्रवाल और तहसीलदार विपिन कुमार चौरसिया मौजूद रहे। सरयू के लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच ग्रामीणों की नजर अब प्रशासन की राहत और बचाव व्यवस्था पर टिकी है। गांवों में पानी बढ़ने के साथ आवागमन, बिजली, भोजन, पेयजल, पशुचारा और स्वास्थ्य जैसी समस्याएं भी गंभीर होती जा रही हैं।
महसी के गांवों में बाढ़ से बिगड़े हालात।
महसी के गांवों में बाढ़ से बिगड़े हालात।