बहराइच। कटान रोकने के लिए बनाया गया बल्ली पाइलिंग पूरी तरह सरयू की धारा में समा गया। अब नदी की तेज धारा जानकीनगर गांव में करीब 40 मीटर अंदर घुस चुकी है, जिससे ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई है। रविवार को पांच पक्के मकान सरयू में समा गए, जबकि आठ और मकान कटान की जद में आ गए हैं।
सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से अब भी 8 सेमी ऊपर है। शनिवार रात तेज धारा ने महसी तहसील के जानकीनगर गांव को भारी तबाही की ओर धकेल दिया। यहां कटान रोकने के लिए लगे बल्ली पाइलिंग को सरयू की लहरें पूरी तरह अपने साथ बहा ले गईं। 50 लाख की परियोजना का गांव के निकट से अस्तित्व खत्म हो गया है। इससे नदी की धारा मोड़ने की कोशिश भी बेकार हो गई।
नदी का कटान इतनी तेज है कि जानकीनगर गांव में 40 मीटर अंदर तक पानी पहुंच गया है। ग्रामीण अपनी गृहस्थी और मवेशियों को नाव के सहारे सुरक्षित स्थानों पर ले जाते दिखाई दे रहे हैं। कटान की मार से गांव का अधिकांश हिस्सा नदी में समा चुका है। 95 में से सिर्फ 17 घर ही बचे हैं।
शनिवार रात नदी ने सुरेंद्र, चेतराम, राजकरन, इंद्रजीत और सुशील के पक्के मकान का अस्तित्व खत्म कर दिया। बालकराम, रामधीरज, मनोज, माधव और सुकई समेत आठ ग्रामीणों के मकान पर नदी की सीधी मार है। कटान की रफ्तार इतनी तेज है कि लोग अपने आशियाने को खुद ही उजाड़कर गृहस्थी व मवेशियों को लेकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा रहे हैं।
कटान के चलते गांव में अफरा-तफरी का माहौल रहा। कई परिवार बच्चों और बुजुर्गों को किसी तरह सुरक्षित स्थानों तक ले गए।
बैराज से रविवार को भी 3.17 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। इसके चलते एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से 8 सेमी ऊपर बना हुआ है। हालांकि जलस्तर में मामूली गिरावट दर्ज की गई, लेकिन कटान की रफ्तार और तेज हो गई है।
कटान पीड़ितों से मिला सपा का प्रतिनिधिमंडल
कटान पीड़ित परिवारों से मिलने रविवार सुबह सपा जिलाध्यक्ष राम हर्ष यादव और उपाध्यक्ष देवेश चंद्र मिश्रा पहुंचे। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले वर्ष कई परिवारों को गृह अनुदान नहीं मिला था। इस वर्ष भी नौ परिवार अब तक वंचित हैं। जिलाध्यक्ष ने एसडीएम महसी आलोक प्रसाद से जांच कराकर मुआवजा दिलाने और प्रभावितों को तत्काल राहत उपलब्ध कराने की बात कही।