बहराइच। सरयू भले ही खतरे के निशान से नीचे आ गई हो, लेकिन उसके किनारे बसे लोगों की परेशानियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। नदी की लहरें लगातार गांवों की जमीन निगल रही हैं, लोग खुद ही अपना घर तोड़कर सुरक्षित जगह जा रहे हैं।
महसी के जानकीनगर में मंगलवार रात चार और घर सरयू में समाहित हो गए, आठ मकान कटान के मुहाने पर हैं। बुधवार सुबह तक चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज से 2.92 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे तटवर्ती गांवों में फिर से बाढ़ और कटान की आशंका गहरा गई है।
मिहींपुरवा से महसी तक कटान का असर दिख रहा है। मिहींपुरवा क्षेत्र के चार गांव, नानपारा के छह और महसी के दो गांवों में नदी लगातार कटान कर रही है। महसी के जानकीनगर में कटान की रफ्तार इतनी तेज है कि मंगलवार रात नदी कटान करते हुए गंगाराम, इंद्राजराम, दसई और रामदास के मकानों को अपने साथ बहा ले गई।
इसके अलावा गांव निवासी आबिद, मुनऊ, भानमती, बब्लू, नीरज और जगराम समेत आठ लोगों के घरों पर नदी की लहरें थपेड़े लेते हुए कटान कर रही है। लोग रोते-बिलखते अपने कच्चे-पक्के मकान तोड़ रहे हैं, ताकि ईंट और लकड़ी बचाकर कहीं और दोबारा घर बना सकें।
बड़खड़िया ग्राम पंचायत के मौरहवा गांव के लोग भी सरयू के तेज कटान से परेशान हैं। चहलवा और विजय नगर के हालात भी कुछ अलग नहीं हैं। वहां के लोग बताते हैं कि नदी किनारे की मिट्टी दिन-रात धंस रही है। फिलहाल जलस्तर स्थिर है, लेकिन चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज से छोड़े गए पानी और तेज कटान ने तटवर्ती इलाकों में दहशत बढ़ा दी है।
सरकारी इंतजाम पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने समय रहते नाव, राशन, तिरपाल, पीने का पानी और पशुओं के चारे का इंतजाम नहीं किया। महसी के जानकीनगर के बुजुर्ग रामफल ने बताया कि हमारे घर तो नदी ले जा रही है, लेकिन सरकार की मदद अब तक कागज पर ही है। नीतू देवी ने बताया कि अब तक कोई भी राहत सहायता नहीं मिली है। तटबंध के किनारे साड़ी तानकर पूरा परिवार जैसे-तैसे गुजर-बसर कर रहा है।
भूख की मार और अधूरी राहत
प्रशासन की ओर से रोज सुबह 250 लंच पैकेट और शाम को 250 पैकेट बांटे जा रहे हैं। एक पैकेट में सिर्फ छह पूड़ियां और थोड़ी सब्जी होती है। ऐसे में ज्यादातर परिवारों में आधे सदस्य भूखे रह जाते हैं। कई छोटे बच्चों का पेट भी भर नहीं पाता। महसी के जानकीनगर में 130 लोग तटबंध व आसपास तिरपाल और साड़ी तानकर गुजर बसर कर रहे हैं। इन परिवारों में सिर्फ पति-पत्नी को ही मानें तो 260 लोग हैं, जबकि बच्चों और बुजुर्गों को मिलाकर संख्या लगभग 600 के आसपास है।