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गेरुआ नदी सूखी, जलीय जीवों पर संकट

Thu, 03 Nov 2016 09:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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जलीय जीवाें पर संकट - फोटो : अमर उजाला
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के बीचोबीच से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी सूख गयी है। इससे नदी में गैंगेटिक डाल्फिन की उछलकूद गुम हो गई है साथ ही धूप सेकते घड़ियाल और मगरमच्छ भी नहीं दिख रहे। शीतकाल में प्रवास के लिए आने वाले साइबेरियन पक्षी की चहचहाहट भी जंगल के वातावरण में अचानक गुम हो गई है। यहां आने वाले पर्यटकों को भी निराश होना पड़ रहा है। 
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नदी के सूखने से जलीय जीवों की सुरक्षा पर संकट उत्पन्न हो गया है। कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में नेपाल के पहाड़ से कई नदी और नाले जंगल के बीच से होकर बहते हैं। इन्हीं में शामिल है नेपाल की गेरुआ नदी। यह नदी कोठिया घाट से भारतीय सीमा में प्रवेश कर कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के बीच से होकर बहती है।

चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज पर गेरुआ नदी का नेपाल से आने वाली कौड़ियाला नदी से संगम होता है। फिर यहां से घाघरा नदी शुरू होती है। बैराज के फाटक की साफ सफाई व मरम्मत हर 6 महीने पर होती है। इसके चलते बैराज के सभी फाटक खोल दिए जाते हैं। इस पर गेरुआ और कौड़ियाला नदियों का पूरा पानी घाघरा में चला जाता है।
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इससे दोनों नेपाली नदियां सूखी नजर आती हैं। इस बार भी चौधरी चरण सिंह गिरिजापुरी बैराज पर मरम्मत के लिए सभी फाटक खोल दिए गए हैं। इसके चलते 24 घंटे में नदी पूरी तरह से सूख गयी। नदी के पूर्वी किनारे पर ही कुछ पानी बचा है। इससे नदी में जलीय जीव गैंगेटिक डाल्फिन, मगरमच्छ और घड़ियाल नहीं दिख रहे हैं।

इस समय गेरुआ नदी की हालत यह है कि लोग पैदल नदी पार कर रहे हैं। प्रवास के लिए साइबेरियन पक्षी हर साल गेरुआ नदी मेें आते हैं। नदी के सूखने से पक्षियों की चहचहाहट गुम हो गई है।
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