बहराइच। विलुप्त होने की कगार पर बाज प्रजातियों में शामिल दुर्लभ ग्रे हेडेड फिश ईगल (सिलेटी सिरबाज) कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग के जंगल में देखा गया है। स्थानीय प्रजातियों में शामिल यह पक्षी बहुत कम ही देखने को मिलता है। इसका मुख्य आहार मछलियां होती हैं जिससे इसे ग्रे हेडेड फिश ईगल कहा जाता है। यह मुख्य रूप से तालाब या नदी के आस-पास देखे जाते हैं, जहां इसे आसानी से भोजन के लिए मछली उपलब्ध हो सके।
कतर्नियाघाट वन्य जीव विहार में अनेक प्रकार के बाज पाए जाते हैं। इनमें प्रमुख रूप से किंग बाज, सिलेटी सिरबाज और सांपमार बाज शामिल हैं। कतर्नियाघाट फ्रेंड्स क्लब के अध्यक्ष भगवान दास लखमानी, हर्षिता लखमानी व सहयोगी विजय जायसवाल के साथ विश्व पर्यावरण दिवस पर कतर्नियाघाट के भ्रमण पर गए थे।
मंगलवार को सुबह जंगल सफारी के दौरान उन्होंने एक पेड़ पर बैठे दुर्लभ सिलेटी सिरबाज को देखा, जो अपने सख्त पंजों में शिकार को दबाए नोच कर खा रहा था। इस रोमांचक दृश्य को लखमानी ने अपने कैमरे में कैद किया और उसका वीडियो भी बनाया। उनका कहना है कि जब भी जंगल जाते हैं कुछ न कुछ नया और अजूबा देखने को मिलता है।
यही जंगल का रोमांच है। उन्होंने बताया कि इसका मुख्य शिकार मछली होता है और जंगल में जहां पानी होता है वहां पेड़ पर शिकार करने के लिए बैठता है। उन्होंने बताया कि यह बाज खरगोश, मछली, मेंढक आदि जीवों को पंजे में दबोचकर उड़ने की शक्ति रखता है।