पाक माह रमजान को लेकर शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित मस्जिदें सज-धजकर तैयार हैं। इनमें साफ-सफाई व रंग रोगन का कार्य पूरा हो चुका है। मुस्लिम धर्मावलंबियों को चांद निकलने का इंतजार था। वह खुशनुमा पल भी शाम होते ही आ गया। शनिवार को चांद का दीदार होते ही सभी ने एक दूसरे को रमजान माह की मुबारकबाद दी। इसके साथ ही तिलावत-ए कुरान से मस्जिदें गूंज उठीं। तरावीह का दौर भी शुरू हो गया।
जिले में रमजान-उल मुबारक का चांद दिखते ही मुस्लिम समुदाय के लोग शनिवार को खुशी से झूम उठे। मस्जिदाें में तरावीह का सिलसिला शुरू हो गया। तरावीह और नमाज के लिए रमजान माह में नमाजियों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए मस्जिदों में चटाई व वजू करने की व्यवस्था की गई है। लाउडस्पीकरों को दुरुस्त कर लिया गया है। इसके अलावा तारावीह पढ़ाने के लिए हाफिजों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
शहर के लाल मीनार मस्जिद, खसियारी मस्जिद, नानपारा मस्जिद, मोती मस्जिद, बड़ी हाट मस्जिद, शिया जामा मस्जिद समेत सभी मस्जिदों में साफ-सफाई और रंग रोगन का काम पूरा कर लिया गया है। खसियारी मस्जिद के मौलाना मोहम्मद आरिफ ने बताया कि मस्जिद में तरावीह 10 दिन में खत्म होगी। उधर, शिया जामा मसजिद में मौलाना दीनी मसायल बयान करेंगे।
खसियारी मस्जिद के मौलाना मोहम्मद आरिफ ने बताया कि शनिवार को पाक रमजान माह के चांद का दीदार हुआ है। इस पर लोगों ने एक दूसरे को रमजान पाक माह की बधाई दी। इसके साथ ही तरावीह का दौर शुरू हो गया। विभिन्न मसजिदों में अलग-अलग समय पर तरावीह का समय निर्धारित है। इसके साथ ही तरावीह पूरा करने की समय सीमा भी अलग-अलग है।
मौलाना मोहम्मद आरिफ ने बताया कि पाक रमजान के दौरान जन्नत के दरवाजे खुल जाते हैं व दोजख के दरवाजे बंद हो जाते हैं। कुरान पढ़ने का सवाब बढ़ जाता है। रमजान में कुरान के एक-एक हर्फ पर 70-70 हर्फों का सवाब मिलता है। इसलिए रमजान माह में इबादत ज्यादा से ज्यादा करना चाहिए।