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अपने को जिंदा साबित करने की जद्दोजहद में फंसे पेंशनर्स

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बहराइच। जिला कोषागार से पेंशन पाने वाले पेंशनर्स को साल में एक बार जीवित प्रमाणपत्र जमा करना पड़ता है। ये प्रमाणपत्र ऑनलाइन जमा करने की सुविधा होने के बाद भी सभी कोषागार कार्यालय में ही फॉर्म भरने में सहजता पाते हैं। ऐसे में इन दिनों सुबह से शाम तक कार्यालय में सैकड़ों पेंशनर पहुंच रहे हैं। इनकी सुविधा के लिए कार्यालय में तीन काउंटर बनाए गए हैं। जिन पर पेंशनर अपना जीवित प्रमाणपत्र जमा कर सकते हैं।
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बहराइच जनपद के विभिन्न विभागों से सेवानिवृत्त होने वाले लगभग 20 हजार से अधिक पेंशनर्स कोषागार कार्यालय से पेंशन पाते हैं। इन सभी पेंशनर को साल में एक बार जीवित प्रमाणपत्र जमा करना होता है। ये प्रमाणपत्र बैंक में भी जमा किया जा सकता है। इसे ऑनलाइन जमा करने की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके बावजूद पेंशनर्स कोषागार कार्यालय में ही प्रमाणपत्र जमा करने में सहजता पाते हैं।
कोषाधिकारी अशोक कुमार प्रजापति ने बताया कि जीवित प्रमाणपत्र जमा करने के लिए कोषागार कार्यालय में तीन काउंटर बनाए गए हैं। अधिकतर पेंशनर साल के आखिरी दो माह में जीवित प्रमाणपत्र जमा करते हैं। ऐसे में नवंबर और दिसंबर माह में कार्यालय में काफी गहमागहमी रहती है। हालांकि अब सरकार की ओर से साल में किसी भी दिन जीवित प्रमाणपत्र जमा करने की सुविधा दे दी गई है।
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बैंकों में कर्मचारी सुनते नहीं हैं बात
कोषागार कार्यालय में बुधवार को जीवित प्रमाणपत्र जमा करने पहुंचे पावर कॉर्पोरेशन के सेवानिवृत्त कर्मी शोभाराम और शिक्षा विभाग के रामसुचित मिश्र ने बताया कि बैंकों में जाने पर प्रमाणपत्र जमा करने को लेकर कर्मचारी उदासीनता दिखाते हैं। जिसके चलते हमें कोषागार में ही प्रमाणपत्र जमा करना पड़ता है।
उधर शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त दुलारा देवी और कृष्णा कुमारी ने कहा कि कोषागार कार्यालय में काउंटर पर कर्मचारी फॉर्म भर देते हैं। जिससे परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। शिक्षा विभाग के त्रिलोकीनाथ तिवारी व पुलिस विभाग की लालता देवी ने कहा कि बुजुर्ग होने के कारण सभी को अपने साथ एक सहयोगी भी लाना पड़ता है। इससे पूरा दिन बर्बाद हो जाता है लेकिन अगर इसे जमा नहीं करेेंगे तो पेंशन बंद होने की भी संभावना रहती है।
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