बहराइच। ग्राम पंचायतों में स्वच्छता के प्रचार-प्रसार की होर्डिंग्स लगाने में हुए करोड़ों के घोटाले के मामले में निलंबित किए गए जिला पंचायत राज अधिकारी (डीपीआरओ) उमाकांत पांडेय की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। गांवों में विकास के नाम पर हुए भ्रष्टाचार के मामले में दो साल पहले मोतीपुर थाने में दर्ज हुए केस में उमाकांत पांडेय समेत तीन पूर्व डीपीआरओ व एक एडीपीआरओ के खिलाफ न्यायालय में केस चलाने के लिए पुलिस ने डीएम से अनुमति मांगी है। चार साल में तैनाती के दौरान करोड़ों हजम करने वाले डीपीआरओ उमाकांत पांडेय की संपत्ति की जांच भी शासन स्तर से कराने की तैयारी की जा रही है।
भ्रष्टाचार के मामले में निलंबित किए गए डीपीआरओ उमाकांत पांडेय बीते चार साल से भी अधिक समय से जिले में तैनात थे। इस दौरान इनके स्तर से सरकारी पैसे का जमकर बंदरबांट किया गया। तमाम ऐसे कार्यों का लाखों रुपये हजम कर लिया गया जो धरातल पर हुए ही नहीं। इसी के बाद वर्ष 2020 में जब होर्डिंग्स घोटाला सामने आया तो तत्कालीन डीएम रहे शंभू कुमार ने इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा।
अमर उजाला ने भी यह मामला प्रमुखता से उठाया। इसके बाद ही अब यह कार्रवाई हुई है। विभागीय सूत्र बताते है कि डीपीआरओ उमाकांत पांडेय ने बहराइच में तैनाती के दौरान करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर ली। अब शासन स्तर से इनकी संपत्ति की जांच के लिए भी तैयारी की जा रही है।
यह है पूरा मामला
जिले के मोतीपुर थाना क्षेत्र में वर्ष 2021 में ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर करोड़ों रुपये गबन करने व जालसाली, धोखाधड़ी, साजिश रचने का केस दर्ज किया गया था। इसमें तत्कालीन डीपीआरओ उमाकांत पांडेय, जिले के पूर्व डीपीआरओ केबी वर्मा व राजेंद्र प्रकाश व पूर्व एडीपीआरओ अरविंद कुमार प्रभाकर आरोपी है। इस मुकदमे के विवेचक क्राइम ब्रांच के एसआई सुरेंद्र प्रताप सिंह ने आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में अभियोग चलाने के लिए डीएम से अनुमति मांगी है। अब डीएम की अनुमति मिलते ही इन आरोपियों पर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होने के साथ केस चल सकेगा।
सफाई कर्मी चलाता था दफ्तर
डीपीआरओ उमाकांत पांडेय ने चार साल की तैनाती में खूब वसूली की। रिसिया ब्लॉक में तैनात एक सफाईकर्मी डीपीआरओ कार्यालय का मुख्य पटल देखता था और इसके जरिए ही डीपीआरओ की वसूली होती थी। इसी के चलते गांव की सफाई का काम करने वाला कर्मचारी महंगे फोन व कार इस्तेमाल करता है। अब डीपीआरओ के निलंबन के बाद इस पर भी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।