बहराइच। जनपद में डेंगू और इंसेफ्लाइटिस ने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। पांच लोगों में बीमारियों की पुष्टि हो चुकी है। मगर अभी तक स्वास्थ्य महकमा कार्ययोजना बनाने में ही जुटा हुआ है। डेंगू के लिए अलग वार्ड अस्पताल में बनाकर किनारा कस लिया गया है। मगर प्रशासन की ओर से संक्रामक बीमारियों को फैलने से रोकने की दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए हैं, जिससे स्थिति और भयावह होने की संभावना है।
पूर्वांचल के जनपदों में मुख्यमंत्री की ओर जापानी इंसेफ्लाइटिस और डेंगू जैसी खतरनाक बीमारियों को जड़ से समाप्त किए जाने का निर्देश दिया जा चुका है। सितंबर शुरू होने के साथ ही डेंगू और जेई जैसी बीमारियों ने लोगों को अपनी चपेट में लेना भी शुरू कर दिया है।
स्वास्थ्य महकमे के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो आठ माह के अंदर मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में डेंगू के 142 संभावित रोगियों की जांच की जा चुकी है। एलाइजा टेस्ट में 139 रोगियों में निगेटिव रिपोर्ट आयी है। मगर तीन मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है।
इसी तरह जापानी इंसेफ्लाइटिस से ग्रसित मरीजों में बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण इनकी जांच भी जिला अस्पताल द्वारा प्रयोगशाला लखनऊ को सैंपल भेजकर करायी जाती है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 27 बीमार बच्चों में 26 के सीरम लेकर उन्हें प्रयोगशाला भेजा जा चुका है। जिसमें 18 सीरम की रिपोर्ट मिली है और दो मरीजों में जेई पॉजिटिव होने की रिपोर्ट भी आ गयी है।
डेंगू और जेई की बढ़ती बीमारियों के बाद भी संक्रामक रोग को रोकने की दिशा में प्रशासन की ओर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जिला अस्पताल में महज एक डेंगू वार्ड बनाकर स्वास्थ्य महकमे ने किनारा कस लिया है।
दो रोगियों की हो चुकी है मौत
मेडिकल कॉलेज में जापानी इंसेफ्लाइटिस से पीड़ित दो मासूमों की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है। लगभग सात मरीज जिला अस्पताल में प्रतिदिन ऑनबेड रहते हैं। इनकी हालत में सुधार भी है। जबकि आठ मरीजों को मेडिकल कॉलेज लखनऊ रेफर भी किया जा चुका है।
बचाव के उपाय
मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. प्रभाकर मिश्रा का कहना है कि डेंगू व मलेरिया से बचाव के लिए बच्चों को फुल बांह का कपड़ा पहनाएं। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें, घरों के आसपास पानी न रुकनें दें। नालियों को साफ रखें। बुखार की शिकायत होने पर तुरंत चिकित्सकों से सलाह लेकर इलाज कराएं।
चलाया जा रहा है अभियान
ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई के प्रति अधिक जागरूकता नहीं होने के कारण लोगों के बीच बीमारियां तेजी से फैलती हैं। संक्रामक रोगों से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। मच्छरजनित रोगों से बचाव के लिए दवा का छिड़काव भी लगातार हो रहा है।
डॉ. सुरेश सिंह, सीएमओ