बहराइच। सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर रविवार को अंतिम चौथी के मौके पर रात भर जियारत का सिलसिला चलता रहा। अकीदतमंदों ने गाजी की शान में कसीदे पढ़ते हुए कव्वाली पेश की और निशान चढ़ाया। गाजी पिया तेरी नजरें करम हो ...कव्वाली से मेला परिसर गूंजता रहा।
सुबह होते ही जायरीन जत्थों में घरों को लौट चले। हम तो चले बाबा रहमो करम कर, गाजी पिया अपनी नजरें करम कर.... कव्वाली संग अकीदत मंदों ने घर की राह ली। इसके चलते ट्रेन और बसों में भीड़ अधिक रही। यात्रियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ा। मेला परिसर में दुकानों पर जमकर खरीददारी हुई।
सैयद सालार मसऊद गाजी की दरगाह पर रविवार को जेठ मेले की अंतिम चौथी पर जियारत के लिए विभिन्न प्रांतों के जायरीनों का रेला उमड़ा। जंजीरी गेट चूमते हुए नाल दरवाजा होकर अकीदतमंदों ने मजार शरीफ पर हाजिरी लगाई।
गाजी की शान में कसीदे व कव्वाली पढ़ते हुए अकीदतमंदों ने चादरपोशी कर मन्नत मांगी। मेला परिसर में स्थापित दुकानों पर जमकर खरीददारी भी हुई। मेले में पूरी रात चहलपहल रही। गाजी की शान में कव्वाली की धुन से मजार शरीफ परिसर गूंजता रहा।
सुबह होते ही जायरीन जत्थों में घरों को लौटने लगे। हम तो चले बाबा अपना करम कर, रहमोकरम बाबा रहमोकरम कर, गाजी पिया अपनी नजरें करम कर...गाते हुए जायरीनों ने घरों की राह ली। जिसके रेलवे स्टेशन व बस अड्डे पर काफी भीड़ रही।
भीड़ होने की वजह से यात्रियों को परेशानियों का भी सामना करना पड़ा। दरगाह प्रबंध समिति के अध्यक्ष शमशाद अहमद व सदस्य बच्चे भारती ने बताया कि रविवार को अंतिम चौथी के साथ ही दरगाह के जेठ मेले का औपचारिक समापन हो गया। अभी पखवारे भर तक मेला परिसर में मनोरंजन के साधन और दुकानें लगी रहेंगी। स्थानीय लोगों जियारत का सिलसिला भी चलता रहेगा।