बहराइच। तराई में मौसम का मिजाज लगातार सख्त बना हुआ है। बुधवार को सुबह से ही चली सर्द हवा ने लोगों को ठिठुरने पर मजबूर कर दिया। करीब आठ किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से बह रही ठंडी हवा के कारण गलन बढ़ गई। मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को जिले का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस, जबकि अधिकतम तापमान 16.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
सुबह के समय कोहरे और ठंड के चलते सड़कों पर आम दिनों की तुलना में आवाजाही कम नजर आई। बाजारों में लोग अलाव के आसपास बैठे दिखे। कड़ाके की ठंड का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों, बच्चों और दिहाड़ी मजदूरों पर देखने को मिला। कई इलाकों में लोग देर तक रजाई और कंबलों में दुबके रहे, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त नजर आया।
दोपहर करीब 12 बजे धूप निकलने पर लोगों को कुछ राहत जरूर मिली। धूप निकलते ही बाजारों और चौराहों पर चहल-पहल बढ़ी। धूप सेंकते हुए लोग आपस में मौसम को लेकर चर्चा करते दिखे।
सिविल लाइंस क्षेत्र निवासी सतीश कुमार ने कहा आज अगर धूप न निकलती तो ठंड काटना मुश्किल हो जाता। सेवानिवृत्त शिक्षक वीएस श्रीवास्तव का कहना था कि धूप निकलते ही शरीर में जान आ जाती है। वहीं बच्चों और बुजुर्गों को छतों व खुले स्थानों पर धूप का आनंद लेते देखा गया।
मौसम विभाग के डॉ. पीएल त्रिपाठी ने बताया कि आगामी तीन दिनों तक मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। सुबह और देर रात घना कोहरा छाने की संभावना है। ऐसे में लोगों को ठंड के साथ-साथ कोहरे की समस्या से भी जूझना पड़ेगा। वाहन चालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. अशोक पांडेय गुलशन के अनुसार कड़ाके की ठंड में शरीर की इम्यूनिटी मजबूत रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि रोजाना गुनगुना पानी पीना, तुलसी, अदरक, काली मिर्च और शहद से बने काढ़े का सेवन करना लाभकारी होता है। सुबह धूप में कुछ देर बैठना शरीर को प्राकृतिक गर्माहट देता है। उन्होंने सलाह दी कि ठंड में हल्दी वाला दूध, तिल और गुड़ का सेवन करें। शरीर में रक्त संचार बनाए रखने के लिए सरसों या तिल के तेल से मालिश फायदेमंद है। ठंडी चीजों से परहेज करें और ऊनी कपड़े पहनें। इससे सर्दी-खांसी और वायरल संक्रमण से बचाव किया जा सकता है।