बहराइच। मिहींपुरवा को नगर पंचायत का दर्जा मिल गया है। निकाय चुनाव के बाद पहली बार नवनिर्मित नगर पंचायत शहर का संचालन ग्राम प्रधानों के हाथों से निकलकर अध्यक्ष व सभासदों के हाथों में चली जाएगी। ऐसे में नगर पंचायत क्षेत्र के मोतीपुर, कुड़वा, परवानीगौढ़ी और मिहींपुरवा के पंचायत भवनों में कब्जा शुरू हो गया है। मामले में जिम्मेदार चुप्पी साधे हुए हैं।
गत वर्ष 2022 में शासन की ओर से विकास खंड मिहींपुरवा को नगर पंचायत करने की घोषणा की थी। नगर पंचायत की घोषणा होने के बाद नगर पंचायत के मानकों को तय करते हुए आबादी के हिसाब से नगर पंचायत में मोतीपुर, कुड़वा, परवानीगौढ़ी को मिहींपुरवा नगर पंचायत में शामिल किया गया था। मौजूदा समय नगर पंचायत के प्रशासक का कार्यभार एसडीएम मोतीपुर को सौंपा गया है।
नवसृजित नगर पंचायत मिहींपुरवा का गठन होने के बाद नगर पंचायत में शामिल हुए गांवों की कमान ग्राम प्रधानों के हाथों से निकलकर नगर की सरकार के गठन के बाद अध्यक्ष व सभासदों के हाथों में चली जाएगी। नगर पंचायत की घोषणा के बाद ही गांवों में स्थित ग्राम पंचायतों के भवनों का कामकाज ठप हो गया था।
ऐसे में पंचायत भवनों पर सन्नाटे को देखते हुए भूमाफियाओं की नजर खाली पड़ी पंचायत की जमीन व भवनों पर टिक गई। हालात यह जिम्मेदारों की अनदेखी का फायदा उठाते हुए भूमाफिया धीरे-धीरे खाली पड़े पंचायत भवनों पर अतिक्त्रस्मण करना शुरू कर दिया।
मोतीपुर के ग्राम प्रधान अजय कुमार वर्मा का कहना है कि कई बार मामले में संबंधित अधिकारियों को प्रार्थनापत्र देकर अवैध कब्जा हटवाने की मांग की जा चुकी है, लेकिन जिम्मेदारों की चुप्पी के चलते अवैध कब्जा धारकों का मनोबल बढ़ा हुआ है।
मोतीपुर स्थित पंचायत भवन तीन बीघे में निर्मित है। पंचायत भवन की बाउंड्री न होने के चलते यह मौजूदा कई वाहनों का अड्डा बन गया है। इसके अलावा मिहींपुरवा स्थित पंचायत भवन समेत कई खलिहान की जमीन पर अवैध कब्जे का सिलसिला शुरू हो गया है। दरोगापुरवा स्थित खलियानों पर तो अवैध तरीके मकान बनवाने की कवायद जारी है।
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