नगर के अग्रवाल अतिथि भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार की रात सुदामा चरित्र व रुक्मिणी विवाह की कथा सुनाई गई। साथ ही सुदामा चरित्र व रुक्मिणी विवाह की भव्य झांकी सजाई गई। विवाह होते ही महिलाओं ने फूलों की होली खेली।
रिसिया के अग्रवाल अतिथि भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में सुदामा और भगवान श्रीकृष्ण के साथ माता रुक्मिणी की झांकी सजायी गई। रुक्मिणी का विवाह होते ही महिलाओं ने फूलों की होली खेलनी शुरू कर दी। सभी श्रद्धालु विवाह कार्यक्रम में फूलों की बारिश के साथ संगीतमय भजन पर झूम उठे।
इस दौरान कथावाचक बिपिन बापू शास्त्री ने सुदामा चरित्र एवं भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति एवं मित्रता पर आधारित कथा का वर्णन किया तो श्रीकृष्ण व सुदामा के जयकारों से पंडाल गूंज उठा। कथावाचक ने कहा कि सुदामा भगवान श्रीकृष्ण के सच्चे मित्र थे।
सच्चे मन से भगवान की भक्ति करने वाले भक्तों के कष्टों का भगवान अवश्य निवारण करते हैं। उन्होंने कहा कि सुदामा के दो मुट्ठी चावल खाकर दो लोक की संपदा को भगवान ने दान कर दिया था। तीसरी मुट्ठी चावल खाने से पहले माता रुक्मिणी ने हाथ पकड़ लिया था।
कथावाचक ने जब गाया अरे द्वार पालों कन्हैया से कह दो, दर पे सुदामा गरीब आ गया है, न सिर पर टोपी न पैरों में चप्पल... तो श्रोता झूमने लगे। इस मौके पर यजमान मदनगोपाल यज्ञसैनी, पुरुषोत्तम शर्मा, जयप्रकाश अग्रहरी, वेदप्रकाश, नंदलाल, सरोज शर्मा, डॉ. राजू निगम, मनोज कुमार गुप्ता आदि मौजूद रहे।