चित्तौरा स्थित महाराजा सुहेलदेव स्मारक स्थल। -संवाद
चित्तौरा। ऐतिहासिक व पौराणिक स्थल चित्तौरा झील का नजारा अब मुफ्त नहीं हो सकेगा। हाल ही में इस स्थल का भ्रमण करने के लिए प्रति व्यक्ति पांच रुपये के टिकट का निर्धारण कर दिया गया है। कार और बस का किराया पहले से ही निर्धारित है।
चित्तौरा पर्यटन स्थल के प्रबंधक सुशील गर्ग ने बताया कि यूपी सरकार की ओर से चित्तौरा झील के आसपास का क्षेत्र पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कराया गया है। ऐसे में यहां आने वाले लोगों की खासी तादाद रहती है।
उन्होंने बताया कि स्थल के रखरखाव के लिए मात्र पांच रुपये प्रति व्यक्ति की दर से टिकट रखा गया है। इसके अतिरिक्त बाइक के लिए 20 रुपये, कार के लिए 30 रुपये तथा बस के लिए 100 रुपये किराया पहले से ही तय है।
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झील का ऐतिहासिक महत्व
चित्तौरा झील का ऐतिहासिक महत्व यह है कि 11वीं शताब्दी में इसी धरती पर महाभारत के बाद दूसरा सबसे बड़ा युद्ध लड़ा गया था। इस युद्ध में महमूद गजनवी के भांजे सैयद सालार मसूद गाजी अपनी सेना के साथ महाराजा सुहेलदेव की सेना के हाथों मार दिए गए थे। सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह झील से नौ किमी दूर स्थित है। जेठ के मेले में आने वाले लोग इसी झील में स्नान करते हैं।
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पौराणिक महत्व
इस झील का पौराणिक महत्व यह है कि त्रेतायुग में यह टेढ़ी नदी के रूप में जानी जाती थी। राजा जनक के गुरु मुनि अष्टावक्र का इसी झील के तट पर आश्रम था। जिस प्रकार मुनि अष्टावक्र का शरीर आठ जगह से मुड़ा हुआ था, उसी प्रकार यह टेढ़ी नदी भी अपने आकार के लिए जानी जाती थी। कालांतर में यह चित्तौरा झील के रूप में प्रसिद्ध हुई।