तीन खेलों को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद नई दिल्ली ने सीआईईटी से बतौर फिल्म के रूप में निर्माण कराया है और उसे ई-पाठशाला पर भी अपलोड किया गया है। अब विद्यालय के अन्य शिक्षक भी प्रेरित होकर विज्ञान, अंग्रेजी व अन्य विषयों को खेल गतिविधियों के जरिए रुचिकर बनाने में जुट गए हैं।
किसी भी देश की तरक्की के लिए वहां पर शिक्षा के स्तर का अच्छा होना बेहद जरूरी होता है।
ऐसे में जवाहर नवोदय विद्यालय कीर्तनपुर के अर्थशास्त्र के वरिष्ठ प्रवक्ता धीरेंद्र नाथ तिवारी ने राष्ट्रीय शैक्षिक और प्रशिक्षण परिषद के लिए शिक्षण को सरल व सुगम बनाने के लिए छह प्रकार के क्रियाकलाप व शैक्षिक क्रियाएं विकसित की हैं। जिसे उन्होंने नीलामी प्रक्रिया द्वारा प्रशिक्षण (ऑक्सनिंग आउट इवेंट), मिनी सेमिनार विधि, केस स्टडी द्वारा कठिन विषयों को पढ़ाया जाना, ग्रुप डिस्कशन पद्धति, क्विज कंपटीशन व नीलामी विधि नाम दिया है।
इन विधियों को विकसित करने में शिक्षक धीरेंद्र को 11 साल लगे हैं। उन्होंने खेल की गतिविधियों से विषय को रुचिकर बनाया है, ताकि बच्चे पढ़ाई को बोझ न समझें और उससे मोहभंग न हो, वो इसे मजबूरी न समझकर इसमें रम जाएं। शिक्षक ने विधियों से सुनिश्चित किया है कि उनके द्वारा पढ़ाया जा रहा कंटेंट क्वालिटी में भी अच्छा हो ताकि विद्यार्थी को अच्छी शिक्षा प्राप्त हो सके।
ई-पाठशाला की वेबसाइट पर तीन पद्धतियां जारी
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद ने शिक्षक धीरेंद्र नाथ तिवारी के तीन पद्धतियों, नीलामी प्रक्रिया द्वारा प्रशिक्षण, मिनी सेमिनार व केस स्टडी विधि को ई-पाठशाला की वेबसाइट पर अपलोड किया है। एनसीईआरटी की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ प्रतिमा कुमारी के निर्देशन में गत वर्ष अक्तूबर माह में जवाहर नवोदय विद्यालय पहुंचकर क्लासरूम में शिक्षण व गतिविधियों का फिल्मांकन किया गया था। तीनों पद्धतियों की फिल्म को एनसीईआरटी ने यू-ट्यूब पर भी प्रसारित किया है। एनसीईआरटी ने शिक्षक धीरेंद्र नाथ तिवारी द्वारा निर्मित पद्धतियों की सीडी प्रदेश के 583 नवादेय विद्यालयों को अपनाने के लिए भेजी है।
विद्यार्थी निभाते हैं शिक्षक की भूमिका
शिक्षक धीरेंद्र नाथ तिवारी कहते हैं कि नीलामी प्रक्रिया, मिनी सेमिनार व केस स्टडी पद्धतियों में खेल की गतिविधियां अलग-अलग हैं। लेकिन खास बात यह है कि तीनों पद्धतियों में पूरी क्लास को समूह में बांट दिया जाता है। प्रत्येक छात्र की सहभागिता होती है। इसके चलते बच्चे क्लास में विषय की तैयारी करके आते हैं। छात्रों की शंकाओं का समाधान समूह के कैप्टन व शिक्षक द्वारा किया जाता है। इस तरह बच्चे शिक्षक की भूमिका निभाते हैं और शिक्षक पथ प्रदर्शक रहते हैं।