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Bahraich News: अब स्कूल बचाने के लिए गांव-गांव जाकर बच्चे खोज रहे शिक्षक

Tue, 24 Jun 2025 12:51 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
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चाईनपुरवा गांव में अभिभावकों से संपर्क करतीं शिक्षिका।
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बहराइच। यूपी सरकार के 50 से कम छात्र संख्या वाले परिषदीय विद्यालयों को दूसरे विद्यालय में विलय करने संबंधी आदेश को लेकर शिक्षकों में खलबली मच गई है। शिक्षक संगठनों ने इस आदेश के खिलाफ माहौल बनाना शुरू कर दिया है। पहले इस आदेश का ज्ञापन के माध्यम से विरोध किया गया। अब शिक्षक-शिक्षिकाओं ने विद्यालय को बचाने के लिए घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क करना शुरू कर दिया है।
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पिछले वर्षों में विभाग परिषदीय विद्यालयों के निरीक्षण के दौरान छात्रों की उपस्थिति को गंभीरता से लेता था और उनकी संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जाता था। इस प्रयास के प्रभावी न होने पर इस सत्र से सरकार ने फैसला किया है कि जिस विद्यालय में बच्चों की संख्या 50 से कम होगी उन्हें दूसरे विद्यालय में विलय कर दिया जाएगा। इसके लिए कम बच्चों वाले विद्यालयों की सूची तैयार की जाने लगी। विभागीय सूत्रों की मानें तो जिले में 50 से कम छात्र संख्या वाले 123 विद्यालयों के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

तेजवापुर क्षेत्र में शिक्षिकाओं ने संभाली स्कूल बचाने की कमान
अपने विद्यालय को बचाने के लिए तेजवापुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय चाइनपुरवा द्वितीय में तैनात प्रधानाध्यापक ममता शर्मा, शिक्षिका जूही साहू व अंजुल धवन ने चाईनपुरवा गांव पहुंचकर घर-घर जाकर अभिभावकों से संपर्क किया और बच्चों का विद्यालय में दाखिला करवाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि गांवों में अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है। नए सत्र में अप्रैल से अब तक सिर्फ 17 बच्चों का दाखिला हुआ है। बच्चों के आधार कार्ड बनवाने पर भी जोर दिया गया है।
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राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने भी किया विलय का विरोध

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की बहराइच इकाई के जिला अध्यक्ष आनंद मोहन मिश्र ने बताया कि शासन के आदेश तहत विभाग के द्वारा 50 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों का विलय किए जाने की तैयारी है। इसके लिए संबंधित विद्यालय के प्रधान शिक्षकों से खंड शिक्षा अधिकारियों के द्वारा सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करवाया जा रहा है। इसका उनका संगठन विरोध करता है। आरटीई एक्ट के अनुसार हर एक किलोमीटर पर प्राथमिक विद्यालय तथा तीन किलोमीटर पर उच्च प्राथमिक विद्यालय होना चाहिए। छह से 14 वर्ष के सभी बच्चों को निशुल्क अनिवार्य शिक्षा बाल अधिकार के तहत मिलनी चाहिए।
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