बहराइच/ शिवपुर। तराई में बारिश थमने लगी है, सरयू समेत कई नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन राहत के बीच तबाही की तस्वीर भी सामने आई है। महसी के जानकीनगर और शिवपुर के बेलामकन चौकसाहार में कटान ने कहर बरपा दिया है।
बीती रात सरयू की तेज धारा नौ परिवारों के आशियाने अपने साथ बहा ले गई। इनमें चार पक्के, दो टिनशेड और तीन फूस के घर शामिल हैं। वहीं, पसियनपुरवा में एक पक्का मकान देखते-देखते सरयू में समा गया। राहत और बचाव के उपाय नाकाफी दिख रहे हैं।
सरयू नदी का जलस्तर कम तो होने लगा है, लेकिन नदी अभी भी एल्गिन ब्रिज पर खतरे के निशान से 27 सेमी ऊपर बह रही है। वहीं महसी के घूर देवी पर नदी का जलस्तर 112.27 दर्ज हुआ। यहां नदी खतरे के निशान से 12 सेमी ऊपर बह रही है। दो सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से जलस्तर में कमी आ रही है, लेकिन इसके साथ ही कटान की रफ्तार बढ़ रही है।
रात में नदी की लहरों ने बेलामकन निवासी सुनीता पत्नी महेश, पार्वती पत्नी शंकर, सुनीता पत्नी ननकऊ, छबीला पुत्र राम धीरज, कजाता पत्नी पैरु, सावित्री पत्नी राम खेलावन, लक्ष्मी देवी पत्नी लाल बहादुर, पराना पत्नी चुन्नू और सुशीला पत्नी कमलेश के मकानों को लील लिया।
लेखपाल पंकज यादव ने बताया कि अभी पांच-छह और मकान कटान के मुहाने पर हैं, जो कभी भी ढह सकते हैं। सभी प्रभावित परिवारों की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है और भोजन व अस्थायी आश्रय की व्यवस्था करा दी गई है।
परागी बेली गांव पर भी मंडरा रहा खतरा
कटान का खतरा परागी बेली गांव तक पहुंच गया है। यहां लोग अपने हाथों से अपने मकान गिरा रहे हैं, ताकि सामान बचा सकें। जुग्गीलाल अवस्थी ने कहा कि बीती रात मेरा आंगन नदी में समा गया, अब घर भी जाने वाला है। गांव के लोगों का कहना है कि कटान से बचाने के लिए अब तक कोई इंतजाम नहीं हुआ है। उपजिलाधिकारी लाल धर यादव और तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर नायब तहसीलदार हर्षित पांडे के साथ बौंडी घाट, बाढ़ चौकी बसंतापुर और अन्य कटान क्षेत्रों का निरीक्षण किया। प्रभावितों को राशन किट और भोजन वितरित किया गया।