भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रुपईडीहा कस्बा में पैदल आवागमन करते लोग।
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रुपईडीहा (बहराइच)। नेपाल सरकार ने करीब दस माह से बंद चल रही सीमा को खोलने का फैसला लिया है। मंत्रि परिषद की बैठक में लिए गए फैसले की जानकारी मिलने से भारतीय क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। कोरोना संक्रमण के चलते सीमाएं सील होने के कारण दोनों देशों के नागरिकों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि नेपाल और भारतीय क्षेत्र के अधिकारी अभी आदेश पहुंचने की पुष्टि नहीं कर पा रहे हैं। मगर नेपाली मीडिया में खबरों के चलने व प्रकाशन के बाद सोशल मीडिया पर भी यह खूब प्रचारित हो रहा है।
भारत में फैले कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद नेपाल सीमा से सटे करीब 30 रास्तों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था। सीमा को सील किए जाने से सबसे अधिक दिक्कत बहराइच से सटे रुपईडीहा और नेपाल के अलग-अलग इलाकों के नागरिकों को हो रही है। 23 मार्च से बंद की गई सीमा को अभी तक आवागमन के लिए पूरी तरह से खोला नहीं गया है। हालांकि दोनों देशों के अधिकारियों की आपसी सहमति के आधार पर पैदल आवागमन हो रहा है। परिवहन सेवाओं पर पूरी तरह से रोक लगी हुई है। सीमा को खोले जाने के संबंध में गुरुवार को ही नेपाल की मीडिया द्वारा मंत्रि परिषद की बैठक में निर्णय लिए जाने की खबर को प्रसारित किया गया है। इसकी सूचना मिलने के बाद नेपाल और रुपईडीहा के लोग काफी उत्साहित व खुश नजर आ रहे हैं। इस बारे में दोनों देशों के अधिकारी अभी आदेश न मिलने की बात कहते हुए आधिकारिक पुष्टि से पीछे हट रहे हैं।
क्या कह रहे अधिकारी
रुपईडीहा में सीमा सुरक्षा का जिम्मा संभाल रही एसएसबी के 42वीं वाहिनी के प्रभारी कमांडेंट प्रवीण कुमार का कहना है कि अभी तक भारत सरकार के गृह मंत्रालय से सीमा पर आवागमन शुरू करने का कोई पत्र नहीं आया है। उधर नेपाल के बांके जिले के सीडीओ रामबहादुर कुआंग का कहना है कि कोरोना के दूसरे स्ट्रोन का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में सीमा पर आवागमन शुरू हो पाने में अभी कुछ और समय लगने की संभावना है।
नेपाल में भी चर्चा तेज
नेपाली मीडिया में प्रचारित हो रही खबरों के बाद वहां के नागरिकों में भी सीमा खुलने को लेकर चर्चा तेज है। अभी तक सीमा खोली नहीं गई है। मगर सभी एक से दो दिन में सीमा खुलने की संभावना को भी इंकार नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में दोनों देशों के नागरिकों में संशय भी बरकरार है।