बिछिया (बहराइच)। नेपाल केे रायल वर्दिया नेशनल पार्क से आया हाथियों का झुुंड गुरुवार की रात गेरुआ नदी पार कर आंबा गांव के पास पहुंच गया। हाथियों की चिंघाड़ से पूरी रात गांव के लोग सो नहीं सके। इस दौरान 20 बीघा फसल भी हाथियों ने रौंद दी। ग्रामीण रातभर हांका लगाते रहे।
नेपाल के रायल वर्दिया नेशनल पार्क से गेरुआ नदी के तट से होकर कतर्नियाघाट रेंज पहुंचे हाथियों के झुंड ने गुरुवार की रात आंबा गांव के किसानों के धान और गन्ने के खेत में जमकर उत्पात मचाया। सात घंटे तक हाथी चिंघाड़ते हुए फसल को रौंदते रहे। इस दौरान मशाल जलाकर ढोल पीटते हुए ग्रामीणों ने हाथियों को भगाने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हुए।
तड़के चार बजे हाथी अपने आप घने जंगल की ओर चले गए। हाथियों के इस उत्पात में किसानों की फसल का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। गौरतलब हो कि कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र नेपाल सीमा से सटा हुआ है। आए दिन नेपाल के रायल वर्दिया नेशनल पार्क से हाथियों का झुंड कतर्नियाघाट पहुंच जाता है।
रात करीब 10 बजे हाथियों का झुंड चिंघाड़ते हुए आंबा गांव के निकट गन्ना और धान के खेतों में पहुंच गया। हाथियों की चिंघाड़ सुनकर गांव के लोग घरों से निकले तो गन्ने के खेतों में करीब हाथी दिखाई पड़े। इस पर ग्रामीणों ने हांका लगाते हुए मशाल जलाकर ढोल पीटना शुरू किया। इसका नतीजा यह रहा कि हाथी गांव की तरफ नहीं आए, लेकिन हाथियों ने 20 बीघा गन्ना और धान की फसल को रौंद कर तहस-नहस कर दिया है।
इससे गांव निवासी जीतबहादुर, कुन्ना, ज्ञानचंद्र यादव, गयाराम, कुंदन, रमेश, परशुराम अवधराम आदि तगड़ी चपत लगी है। ग्रामीणों ने बताया कि सुबह करीब चार बजे हाथी जंगल की ओर चले गए। हाथियों के उत्पात की सूचना रेंज कार्यालय पर दी गई, लेकिन कोई भी वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा।