सड़क दुर्घटना में घायल एक किशोर को पुलिस ने जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टर जांच करने के बाद किशोर को मृत घोषित कर दिया। शव को मर्च्युरी लाया गया। परिवारीजन शव के पास बिलख रहे थे कि तभी उन्हें मृत किशोर की सांस चलने का आभास हुआ। शव को फिर से इमरजेंसी ओपीडी लाया गया, लेकिन डॉक्टर व अन्य मेडिकल कर्मी नदारद मिले।
तब तक काफी लोग मौके पर जुट चुके थे। आक्रोशित लोगों ने डॉक्टर व अन्य मेडिकल कर्मियों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इससे अस्पताल में अफरातफरी मच गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने करीब दो घंटे के बाद स्थिति पर काबू पाया। दरगाह थाना अंतर्गत चैतूपुरवा गांव निवासी ओंकारनाथ का बेटा अर्जुन उर्फ छोटू (15) रविवार सुबह बहराइच-गोंडा मार्ग स्थित बलभद्र सिंह डिग्री कॉलेज में साथी अतुल को लेखपाल की परीक्षा दिलाने गया था।
छोटू ने अतुल को परीक्षा देने के लिए डिग्री कॉलेज के समीप छोड़ा, इसके बाद वह बाइक से लौटने लगा। खुटेहना के पास तेज रफ्तार जीप ने उसे टक्कर मार दिया। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल में इमरजेंसी ओपीडी इंचार्ज डॉ विश्वास चंद्र ने छोटू को मृत घोषित कर दिया। परिवारीजन विलाप कर रहे थे तभी मृतक छोटू की सांस चलने का आभास हुआ।
चाचा त्रिलोकी व चचेरे भाई मोहित का कहना है कि छोटू जिंदा था, इसके बावजूद डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। गुस्साए लोगों ने डॉ. विश्वास व फार्मासिस्ट डॉ. एके चौधरी को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। इसके बाद परिवारीजनों ने इमरजेंसी गेट पर शव रखकर प्रदर्शन किया। सूचना पर सीओ सिटी अनूप कुमार पहुंचे।
सीओ ने लोगों को शांत कराने का प्रयास किया। लेकिन तीमारदार डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। करीब ढाई घंटे तक हंगामा चला। इससे अन्य मरीजों को काफी परेशानी हुई।