जिले के कई रमणीक स्थान पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं लेकिन प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते यहां पर सुविधाओं का विकास ही नहीं हो सका है। पयागपुर का तालाब बघैल और चित्तौरा झील उपेक्षा का दंश झेल रहा है। जिले में महज कतर्नियाघाट को ही पर्यटन के लिए बढ़ावा दिया जा सका है। यहां पर 12 करोड़ की परियोजनाओं को भी स्वीकृति मिल चुकी है।
बहराइच जनपद जंगली क्षेत्रों से घिरा होने के साथ ही चारों ओर से नदी और झीलों से भी घिरा हुआ है। यहां पर पर्यटन के लिए अपार संभावनाएं हैं। जिले में कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग को ही अभी तक पर्यटन विभाग की ओर से विकसित करने के लिए चयनित किया गया है जबकि बहराइच में विकास खंड पयागपुर का तालाब बघैल भी पर्यटन की दृष्टि से अहम स्थान रखता है।
यह क्षेत्र बंगाली परिवारों के निवास करने के कारण काफी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। बंगाली विस्थापितों की वेशभूषा और उनका रहन-सहन पर्यटकों को आकर्षित करने वाला है लेकिन जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण यहां पर पर्यटन की सुविधाएं विकसित नहीं हो सकीं हैं।
इसी तरह बहराइच की पूर्व दिशा में स्थित चित्तौरा झील भी पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। यहां महाराजा सुहेलदेव का मंदिर होने के साथ ही धार्मिक दृष्टि से भी पर्यटन की काफी संभावनाएं हैं लेकिन यह स्थान भी उपेक्षा का दंश झेल रहा है। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग को जरूर पर्यटन के लिए चयनित किया गया था जिससे यहां पर 12 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है।
विकास खंड पयागपुर में स्थित तालाब बघैल भी पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। हालांकि उपेक्षा के चलते यहां पर पर्यटन सुविधाओं का विकास नहीं हो पाया है। उत्तर प्रदेश पर्यटन बोर्ड के सदस्य के रूप में पयागपुर राजघराने के सर्वेंद्र विक्रम सिंह को नामित किये जाने के बाद तालाब बघैल के विकसित होने की संभावना जगी है।
बोर्ड के सदस्य ने बताया कि यहां के लिए 11 करोड़ 38 लाख की परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया गया है। जल्द ही मुख्यमंत्री की ओर से इसे हरी झंडी मिलने की उम्मीद है।