बहराइच। तराई में बीते तीन दिनों से मौसम लगातार तेवर बदल रहा है। बुधवार रात जिले के कई हिस्सों में बारिश हुई तो बृहस्पतिवार को दिन भर मौसम साफ रहा। शुक्रवार सुबह पूरी तराई भीषण कोहरे की चादर में लिपटी नजर आई। दृश्यता कम होने से वाहनों की रफ्तार धीमी रही। शुक्रवार सुबह लगभग 16 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चली सर्द हवा ने लोगों को घरों में दुबकने को मजबूर कर दिया। अधिकतम तापमान छह डिग्री सेल्सियस लुढ़ककर 22 डिग्री पर पहुंच गया। न्यूनतम तापमान में भी चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई।साल के शुरुआती दिनों में पड़ी भीषण ठंड के बाद मकर संक्रांति से राहत मिलनी शुरू हो गई थी। लगातार सूर्यदेव के दर्शन हो रहे थे और दिन के समय में लोग हाफ जैकेट में नजर आने लगे थे। इधर, बीते दो दिनों में मौसम ने फिर रंग बदला और ठंड फिर बढ़ गई। शुक्रवार भोर से ही पूरी तराई घने कोहरे के चपेट में रही। इस वजह से सुबह सड़कों टहलने वालों की भीड़ नजर नहीं आई। जो लोग निकले भी तो फुल जैकेट, टोपी व जूता-मोजा पहनकर। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 22 डिग्री तो न्यूनतम 11 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 28 तो वहीं न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस था।
वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. वीपी शाही ने बताया कि तापमान में आई गिरावट गेहूं के लिए फायदेमंद होगी। जितनी अधिक ठंड पड़ेगी गेहूं के पौधे का उतना विकास होगा। हालांकि, लगातार हो रही बदली आलू के लिए खतरनाक हो सकती है। लगातार बदली होने पर आलू की फसल में झुलसा रोग लग सकता है। किसानों को फसल की जांच करते रहना चाहिए और बचाव के लिए दवा का छिड़काव कर देना चाहिए।