संवाद न्यूज एजेंसी
बहराइच। महसी तहसील के महराजगंज कस्बे में बीते 13 अक्तूबर को मूर्ति विसर्जन जुलूस के दौरान गाना बजाने के लेकर भड़की हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि यह आरोपी अभी तक नेपाल में शरण लिए था। पुलिस ने बुधवार को हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता को महराजगंज कस्बे से गिरफ्तार करने का दावा किया है। पकड़े गए आरोपी के बारे में एएसपी ग्रामीण दुर्गा प्रसाद तिवारी ने पुलिस लाइन सभागार पत्रकारों को बताया। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश किया जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।
एएसपी ग्रामीण ने बृहस्पतिवार को पुलिस लाइन में पकड़े गए मुख्य साजिशकर्ता खुर्शीद आलम अहमद के बारे में खुलासा किया। बताया पुलिस टीम को घटना की जांच के दौरान महराजगंज कस्बा निवासी खुर्शीद के बारे में अहम जानकारी मिली। जुलूस वाले दिन पहले से ही आरोपी अपने साथियों के साथ जुलूस निकलने के दौरान षडयंत्र बनाते हुए खड़ा हो गया था। जैसे ही कस्बे में जुलूस पहुंचा तभी उसने अपने साथियों के साथ गाना बजने पर एतराज जताते हुए लोगों को भड़काना शुरू कर दिया। जिसके बाद हिंसा भड़क गई और युवक की गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने अभी तक घटना में शामिल रहे दस लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं तीन अन्य आरोपी जावेद, सैफ और शोएब की पुलिस तलाश कर रही है। फरार आरोपियों पर दस-दस हजार का ईनाम भी घोषित है। पुलिस ने हिंंसा में संलिप्त दोनों पक्षों से अब तक लगभग 124 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
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महराजगंज हिंसा में शामिल लोगों को सोशल मीडिया वीडियो और इलैक्ट्राॅनिक साक्ष्य और पुलिस जांच के आधार पर लगातार पकड़ा जा रहा है। मुख्य साजिशकर्ता को भी पकड़ लिया गया है। हत्या में शामिल दस लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें लगातार दबिशें डाल रही हैं।
दुर्गा प्रसाद तिवारी, एएसपी ग्रामीण
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घटना के बाद भाग गया था नेपाल
पुलिस उच्चाधिकारियों के अनुसार घटना के तुंरत बाद खुर्शीद अपने रिश्तेदारों के यहां नेपाल भाग गया था और वहीं छिपकर बैठा हुआ था। पुलिस को सूचना मिली वह कस्बा आया हुआ जिस पर टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे पकड़ लिया।
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गणेश विसर्जन जुलूस में भी की थी हिंसा भड़काने की कोशिश
खुर्शीद के बारे में जांच के दौरान प्रमुख तथ्य निकलकर सामने आया है। पुलिस ने बताया दुर्गा प्रतिमा विसर्जन से लगभग एक माह पहले गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान भी उसने सांप्रदायिक भावना बिगाड़ने का प्रयास किया था। जिसमें वह असफल रहा था, लेकिन दोबारा से दुर्गा विसर्जन में वह अपनी मंशा में कामयाब हो गया।