सरकारी स्कूल और कॉलेजों में खेलकूद प्रतियोगिताओं की धूम है। इसके लिए बजट की जो व्यवस्था की गई है उससे स्कूल स्तर से राज्य तक खेलों का आयोजन करना बेहद कठिन है। ऐसे में पगडंडियों की प्रतिभाओं को निखार आगे लाने की सरकारी कोशिशों पर पैसे की कमी भारी पड़ रही है।
जिले के 14 ब्लॉकों में 2470 प्राथमिक और 983 जूनियर विद्यालय हैं। प्रत्येक ब्लॉक में करीब 176 प्राथमिक व 70 जूनियर स्कूल संचालित हैं। इसके बावजूद विद्यालयवार खेल का कोई बजट निर्धारित नहीं है। एक ब्लॉक को खेलों के आयोजन के लिए 5682 रुपये दिए जाते हैं। इस बजट से स्कूल स्तर पर प्रतियोगिताओं का आयोजन कराने के बाद न्याय पंचायत व ब्लॉक स्तर पर प्रतियोगिताएं कराई जाती हैं।
इसी बजट में जिला स्तर पर प्रतियोगिताएं होती हैं। जिले स्तर पर चयनित होने वाली टीम को इसी बजट में स्टेट स्तर पर प्रतिभागिता के लिए भेजा जाता है। विभागीय जानकार बताते हैं कि न्याय पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाले खेलों में ही 8 से 10 हजार का खर्चा आता है।
ऐसे में खेल प्रतियोगिताएं किस तरह आयोजित होती होंगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। जिला स्तर पर आयोजित होने वाली प्रतियोगिताओं में सभी 14 ब्लॉक की टीमें प्रतिभाग करती हैं। तीन दिवसीय प्रतियोगिता मेें छात्रों के ठहरने और भोजन का इंतजाम शिक्षा विभाग के अधिकारियों को करना होता है।
बजट के अभाव में आयोजन बदहाल होते हैं। खिलाड़ियों के लिए उचि भोजन की व्यवस्था हो पाती है न ही उनके रहने का इंतजाम। औपचारिकताओं में वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिताएं निपट जाती हैं।