बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध सांस्कृतिक महासम्मेलन शनिवार देर रात सांस्कृतिक कार्यक्रम व आशीर्वाद के बीच संपन्न हुआ। इस दौरान बुधं शरणं गच्छामि, धममं् शरणं गच्छामि से श्रावस्ती गूंजायमान रही। इस दौरान सिक्किम, भूटान व लद्दाख के कलाकारों ने भगवान बुद्ध के जीवन चरित्र पर अपनी नृत्य नाटिका प्रस्तुत की।
धर्मगुरू ने बुद्ध भूमि पर दोबारा आकर पूजन करने की इच्छा भी जताई। मलेशियाई ग्रुप द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संस्कृति महासभा के अंतिम दिन धर्मगुरू परंपावन 37वें ड्रिंगुंड कार्शुद संप्रदाय के प्रमुख क्यूब गोन छेछांग्ड रिपोंछे ने बुधं शरणं गच्छामि, धममं् शरणं गच्छामि के उद्घोष के साथ कार्यक्रम में आए उपासक उपासिकाओं को आशीर्वाद दिया।
भगवान बुद्ध की धरती श्रावस्ती पर यह महासभा करने वाले मलेशियाई ग्रुप को आशीर्वाद दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि उन्हें इस धरती पर आने का मौका फिर मिले। वह यहां आकर अपने अंदर भगवान बुद्ध को महसूस करते हैं। इस धरती के कण कण में आज भी भगवान बुद्ध के उपदेश गुंजायमान हैं।
यहां की हवाएं भगवान बुद्ध के जीवन चरित्र को हर व्यक्ति के कानों तक स्वत: पहुंचाती है। यह वह धरती है जिसने भगवान बुद्ध को अपनी ओर इतना आकर्षित किया कि वह बार बार यहां आकर यहां के लोगों को अपने अमृतवाणी से तृप्त करते रहे।
मैं इस सुखद अनुभूति को महसूस करने के लिए दोबारा यहां आना चाहूंगा। वहीं इस दौरान सिक्किम, भूटान व लद्दाख से आए कलाकारों ने नमोनमों रिपोंछे दलाई लामा का गीत प्रस्तुत कर लोगों का मन मोह लिया। इस दौरान काफी संख्या में बौद्ध अनुयायी मौजूद रहे।