कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती रविवार को श्रीलंका से आए अनुयायियों के 120 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु दीपालोक के नेतृत्व में पारंपरिक ढंग से बोधि वृक्ष की पूजा की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु दीपालोक ने कहा कि एक समय भगवान बुद्ध श्रावस्ती के जेतवन में विहार कर रहे थे। उस दौरान उन्होंने निर्वाण संबंधी उपदेश दिया, जिसे भिक्षु बड़े ध्यान से सुन रहे थे। इसी बीच पाप ने भिक्षुओं की मति फेरने की योजना बनाई और कृषक का रूप धारण कर बुद्ध के पास पहुंच गया।
कृषक रूपी पाप ने बुद्ध से पूछा कि उनके बैल खो गए हैं, क्या उन्होंने बैल देखे हैं। बुद्ध तत्काल उसे पहचान गए और बोले कि हे पापी तुम्हें बैलों से क्या काम है। इस बीच पापी ने कहा कि वह स्वयं ही आंख, रूप और विज्ञान है, उससे कोई छूट नहीं सकता है। इस पर बुद्ध ने पापी को ललकारते हुए कहा कि तुमसे बचना बहुत ही आसान है। लोगों को अपने अंदर झांकने की जरूरत है, जिसके लिए आत्मज्ञान पर ध्यान देना होगा।